जी भर कर निहार भी नहीं पाए लाडले को
परिजन, रिश्तेदार, दोस्त व क्षेत्रवासी उसकी एक झलक देखने को राह तक रहे थे। उसका शव पहुंचा तो उसे एक बार जी भर कर देख लेना चाहते थे लेकिन कुछ ही देर में उसे अंतिम विदाई दी। इस दौरान परिजनों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। ब्यावर निवासी चैत्य सांखला, साहिल तेजी, संदीप सांगेला, अक्षय कुमावत, लालचंद डुलगच, नितेश पंडित व नरेन्द्रसिंह गत 7 जुलाई को सैर-सपाटे के लिए कुल्लू- मनानी गए थे।