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RPSC Paper Leak: सिस्टम पर सवाल…बाबूलाल कटारा ने जेल में रहते पूरा किया कार्यकाल, नहीं हो सका बर्खास्त

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य बाबूलाल कटारा का जेल में रहते हुए कार्यकाल पूरा हो गया है। पेपरलीक मामले में निलंबित कटारा को बर्खास्त करने के लिए सरकार ने राष्ट्रपति को रेफरेंस भेजा था, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ।
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Babulal Katara

बाबूलाल कटारा (Photo-Patrika)

अजमेर. पेपरलीक प्रकरण के चलते सुर्खियों में रहे राजस्थान लोक सेवा आयोग सदस्य बाबूलाल कटारा का कार्यकाल बुधवार को पूरा हो गया। राज्य सरकार ने निलंबित चल रहे कटारा को बर्खास्त करने के लिए राष्ट्रपति को रेफरेंस भी भेजा था, लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं हुआ। कटारा का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब आयोग में सदस्यों के खाली पदों की संख्या चार हो गई है। वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 के पेपर लीक मामले में एसओजी ने 18 अप्रैल 2023 को बाबूलाल कटारा, आयोग के बर्खास्त ड्राइवर गोपाल सिंह और विजय कटारा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने जनवरी 2024 में कटारा को निलंबित कर दिया और उसके बाद कटारा की पुलिस उप निरीक्षक भर्ती-2021 पेपर लीक प्रकरण में भी लिप्तता पाई गई। इसके बाद एसीबी ने कटारा की संपत्ति का ब्योरा भी एकत्रित किया था।

नहीं हो सका बर्खास्त

अन्यत्र कार्य करने, दिवालिया होने, मानसिक-शारीरिक रूप से अक्षम होने पर आयोग अध्यक्ष अथवा सदस्य के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है। राष्ट्रपति ऐसे मामले में उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्तगी आदेश जारी करते हैं। हालांकि कटारा के मामले में सरकार के रेफरेंस भेजने के बावजूद बर्खास्तगी की कार्यवाही नहीं हो सकी।

सदस्यों के चार पद रिक्त

आयोग में जून से स्थायी अध्यक्ष नहीं है। फिलहाल आयोग सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरीसिंह के पास अध्यक्ष का चार्ज है। उनके साथ ही प्रो. अयूब खान, हेमंत प्रियदर्शी, प्रो. दीपक शर्मा, प्रो. सुशील बिस्सू और प्रो. संतोष आनंद भी आयोग सदस्य हैं।

नहीं हो सका बर्खास्त

अन्यत्र कार्य करने, दिवालिया होने, मानसिक-शारीरिक रूप से अक्षम होने पर आयोग अध्यक्ष अथवा सदस्य के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है। राष्ट्रपति ऐसे मामले में उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्तगी आदेश जारी करते हैं। हालांकि कटारा के मामले में सरकार के रेफरेंस भेजने के बावजूद बर्खास्तगी की कार्यवाही नहीं हो सकी।

आरपीएससी अध्यक्ष - सचिव बुलाए, तो दो दिन में ही आदेश का पालन

जयपुर. अवमानना याचिका दायर होने के बावजूद हाईकोर्ट के आदेश का चार साल से पालन नहीं हो रहा था, लेकिन बुधवार को राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के अध्यक्ष-सचिव के हाजिर होते ही दो दिन में आदेश की पालना का भरोसा मिल गया। कोर्ट ने पालना के लिए समय देते हुए सुनवाई 28 अक्टूबर तक टाल दी। न्यायाधीश अशोक कुमार जैन ने बुधवार को इस मामले में गणपत लाल की याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह व कार्यवाहक सचिव आशुतोष गुप्ता वीसी से हाजिर हुए, उनकी ओर से लंबित मामले पर मौखिक रूप से जवाब दिया कि पूरा आयोग ही निर्णय कर सकता है। इस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि आप तो कार्यवाहक ही है, आपको तो आयोग का कामकाज सुचारु लगाने के लिए लगाया गया है फिर अदालती आदेश की पालना क्यों नहीं की जा रही? इस पर उन्होंने अदालती आदेश की पालना के लिए शुक्रवार तक का समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई टालते हुए 28 अक्टूबर तक पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

यह मामला पीटीआइ भर्ती-2011 में ग्रेड द्वितीय और तृतीय भर्ती से जुड़ा हुआ है, जिस पर मंगलवार को अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट से कहा था कि आरपीएससी को पहले ही सिफारिश भेजी जा चुकी है। इस भर्ती में एससी श्रेणी के एक उम्मीदवार के नाम की सिफारिश आरपीएससी द्वारा की जानी है, जो अभी तक सरकार को प्राप्त नहीं हुई है। आयोग की सिफारिश मिलते ही सरकार त्वरित कार्रवाई करेगी। वहीं, आरपीएससी की ओर से सरकारी पक्ष से आयोग को अवगत कराने के लिए एक दिन का समय मांगा गया था।