
अजमेर। ‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है’ यही ध्येय वाक्य दो दोस्तों के लिए वरदान साबित हुआ जब उन्होंने कबाड़ से ई-साइकिल तैयार कर दी। सौलर पैनल एवं बैटरी से चलने वाली ई-साइकिल ने घर-स्कूल की दूरी ना केवल कम कर दी बल्कि मध्यम वर्ग के परिवार पर टेम्पो किराए आदि के आर्थिक भार से भी छुटकारा मिल गया।
तोपदड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की 11वीं कला वर्ग के दो छात्रों ने ई-साइकिल तैयार कर इनोवेशन की अन्य बच्चों में अलख जगाई है। नागफणी में रहने वाले छात्र संदीप सामरिया एवं नितेश कश्यप ने मिलकर ई-साइकिल तैयार की। संदीप के अनुसार उसके पिता रामनिवास सामरिया कबाड़ का काम करते हैं।
घर में कबाड़ में कुछ मोटरें, बैटरी आदि होने पर उसने कुछ इनोवेशन का प्लान बनाया। दोस्त नितेश कश्यप के साथ मिलकर साइकिल पर मोटर, बैटरी एवं सौलर पैनल लगाकर ई-साइकिल तैयार की। संदीप के मन में विचार आया कि साइकिल बैटरी से तो चलती है, क्यों ना सौलर पैनल वाला सिस्टम तैयार किया जाए।
उसने छोटे सौलर से बड़ी बैटरी को चार्ज किया। बड़ी बैटरी चार्ज होने से उसने सौलर का वॉल्ट बढ़ाया और एम्पीयर कम किया। इससे बैटरी अच्छी तरह चार्ज होने लगी। उन्होंने उसे साइकिल पर लगाया और ई-साइकिल को स़ड़क पर उतारा। उन्होंने बताया कि इस पर करीब 6 हजार रुपए का खर्चा आया।
संदीप व नितेश ने बताया कि स्कूल की दूरी घर से करीब 6 से 7 किलोमीटर होने पर परेशानी होती थी। इलेक्टि्रक साइकिल का विचार किया, लेकिन इसकी कीमत करीब 25-26 हजार रुपए होने से उनका परिवार खरीद नहीं पाया। फिर दोनों दोस्तों ने सौलर पैनल से ई-साइकिल बनाकर विकल्प तलाशा। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के पास भी इतने पैसे नहीं कि वे उन्हें बाइक या इलेक्टि्रक साइकिल दिला सकें। नितेश के पिता पेशे से बग्घी चलाते हैं। स्कूल प्रबंधन एवं विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी बच्चों के प्रयास को सराहा।
Updated on:
16 Feb 2024 06:13 pm
Published on:
16 Feb 2024 11:57 am
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