
smart phones
अलीगढ़। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुम्बई के प्रोफेसर गिरीश कुमार ने कहा कि स्मार्ट फोन के बहुत से लाभ हैं, परन्तु उन्हें अपने शरीर एवं कानों से दूर रखना भी अत्यन्त आवश्यक है। इनके रेडियेशन से शरीर को भारी नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि इन स्मार्ट फोन्स के अत्यधिक प्रयोग से युवाओं में ब्रेन कैंसर की सम्भावना 400 प्रतिशत अधिक होती है। प्रोफसर कुमार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग द्वारा ‘‘मल्टीमीडिया, सिंग्नल प्रोसेसिंग तथा कम्युनिकेशन टेक्नालोजी’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘‘इम्पैक्ट-2017’’ के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
ये होती हैं बीमारियां
प्रो. कुमार ने सेल फोन तथा इसके टावरों द्वारा छोड़े गये विकिरण के हानिकारक प्रभाव तथा हल विषय पर मुख्य भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि बच्चों तथा युवाओं पर विकिरण का प्रभाव तेज होता है। इससे पौरुष शक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि लगातार चार वर्षों तक प्रतिदिन 30 मिनट से अधिक समय तक सेल फोन का प्रयोग करने से सुनने की शक्ति क्षीण हो जाती है। उन्होंने कहा कि सेलफोन का अत्यधिक प्रयोग करने से देखने की शक्ति भी कमजो़र पड़ जाती है। अधेड़ उम्र तक के लोगों में मानसिक बीमारियां उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है, जिनमें अल्जाइमर तथा पार्किनसन जैसी बीमारियां महत्वपूर्ण हैं।
जीवों और पेड़-पौधों पर भी प्रभाव
प्रो. कुमार ने कहा कि मोबाइल टावर के विकिरण से चिड़ियों, शहद की मक्खियों तथा तितलियों समेत अन्य जीवों तथा पेड़ पौधों पर अत्यन्त हानिकारक प्रभाव पड़ रहे हैं, जिनसे आने वाले समय में इनकी कई प्रजातियों के लुप्त हो जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि हम इन फोन्स के सीमित प्रयोग से वातावरण के संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ज्ञात हो कि प्रो. कुमार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने 1978 में यहां से बीएससी इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी।
कुलपति ने किया उद्घाटन
इससे पूर्व इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा मल्टी मीडिया सिग्नल प्रोसेसिंग एण्ड कम्युनिकेशन टेक्नालोजी पर आयोजित कांफ्रेंस का उद्घाटन कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से टेक्नालोजी में क्रांतिकारी परिवर्तन आ रहे हैं, उनमें आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक, इंडस्ट्रियल सेफ्टी और सोलर एनर्जी में बड़े स्तर पर शोध कार्य हो रहे हैं।
वैज्ञानिक पैदा करें विश्वविद्यालय
मुख्य अतिथि कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के प्रो. उमर एम रमाही ने कहा कि विश्वविद्यालयों को वैज्ञानिक पैदा करने चाहिए जो अपने शोध कार्यों से विश्व में बदलाव ला सकें। इंजीनियरिंग संकाय के डीन प्रो. मुहम्मद इदरीस, इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिन्सिपल प्रो. एम सुफियान बेग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के चेयरमैन प्रो. एम हसन व आईआईटी दिल्ली के प्रो. शांतनु चौधरी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उपस्थितजनों का आभार प्रो. सालिम बेग ने बताया। अध्यक्षता प्रो. परवेज मुस्तजाब ने की।
Published on:
26 Nov 2017, 8:18 AM IST
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