
मगरमच्छ का रेस्क्यू करते हुए (फोटो - पत्रिका)
अलवर में मगरमच्छ (Crocodile) के दुकान में घुसने का एक डरावना मामला सामने आया है। सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake) के पास बख्तपुरा बावड़ी स्टैंड स्थित नवनिर्मित छावड़ी कॉम्प्लेक्स की एक दुकान में रात के समय मगरमच्छ घुस गया। वह दुकान में रखी चारपाई के नीचे छिपकर बैठ गया। सुबह दुकान में सो रहे लोगों की नजर मगरमच्छ पर पड़ी तो अफरा-तफरी मच गई।
जानकारी के अनुसार दुकान में चरण सिंह, जगत सिंह, उमेश, राजा और ऋषि चारपाई पर सो रहे थे। इसी दौरान चरण सिंह की नजर चारपाई के नीचे गई। वहां मगरमच्छ दिखाई देते ही सभी लोग घबरा गए और तुरंत चारपाई छोड़कर दुकान से बाहर निकल आए। देखते ही देखते घटना की जानकारी आसपास के लोगों तक पहुंच गई और ग्रामीण भी मौके पर जमा हो गए।
ग्रामीणों ने मामले की सूचना वन विभाग (Forest Department) को दी। रेंजर शंकर सिंह शेखावत के निर्देश पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम में रघुवीर गुर्जर, वनपाल सिंबू सिंह शेखावत, चरण सिंह और सुंदर सिंह शामिल रहे। टीम ने पहले लोगों को मगरमच्छ से सुरक्षित दूरी पर किया और इसके बाद सावधानी के साथ मगरमच्छ रेस्क्यू (Crocodile Rescue) अभियान शुरू किया।
मगरमच्छ चारपाई के नीचे होने के कारण उसे बाहर निकालना आसान नहीं था। काफी मशक्कत के बाद सरिए की मदद से मगरमच्छ को चारपाई के नीचे से बाहर निकाला गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे सावधानीपूर्वक दुकान से बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान आसपास मौजूद लोगों को दूर रखा गया, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
इस पूरे अभियान में रघुवीर गुर्जर ने अपनी जान जोखिम में डालकर मगरमच्छ को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई। टीम की सतर्कता और ग्रामीणों के सहयोग से मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake) में वापस छोड़ दिया गया।
मगरमच्छ के झील में पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन विभाग ने लोगों से अपील की कि आबादी क्षेत्र में मगरमच्छ या कोई अन्य वन्यजीव (Wildlife) दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे पकड़ने की कोशिश नहीं करें। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जा सके।
सिलीसेढ़ झील के आसपास वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए ग्रामीणों से सतर्क रहने को कहा गया है। इस घटना में समय रहते सूचना मिलने और वन विभाग की टीम के पहुंचने से मगरमच्छ को बिना नुकसान पहुंचाए उसके प्राकृतिक आवास में वापस पहुंचाया जा सका।
Updated on:
05 Oct 2026 11:42 am
Published on:
05 Oct 2026 11:42 am
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