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रामगढ़ उप चुनाव में बीजेपी – कांग्रेस के बड़े दिग्गजों की साख दांव पर

यह चुनाव केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव और वनमंत्री संजय शर्मा वर्सेस कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच माना जा रहा है। इनकी साख दांव पर है।

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CG Politics

रामगढ़ विधानसभा सीट पर उप चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा और कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी है। अभी प्रत्याशियों की घोषणा होना बाकी है, लेकिन नेताओं ने वोट का गुणा-भाग लगाना शुरू कर दिया है। यह चुनाव केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव और वनमंत्री संजय शर्मा वर्सेस कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच माना जा रहा है। इनकी साख दाव पर है।

सिंह और जूली ने संभाल रखी है कमान

कांग्रेस की बात की जाए तो यहां जितेंद्र सिंह और टीकाराम जूली ने कमान संभाली है। दोनों नेताओं ने न केवल फूलबाग में सभी विधायक, प्रभारी की बैठक ली, बल्कि रामगढ़ में भी कार्यकर्ताओं की बैठक ले चुके हैं। इसके अलावा अलवर के एक रिसॉर्ट में जिलेभर के कार्यकर्ताओं की बैठक ली थी। प्रचार-प्रसार की रणनीति के साथ ही नेताओं के दौरे को लेकर रणनीति बनाई जा रही है।

अलवर प्रवास कर चुके यादव, शर्मा भी क्षेत्र में सक्रिय

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की बात की जाए तो वे दो बार अलवर का प्रवास कर चुके हैं। इसके अलावा लगातार अपनी टीम के माध्यम से फीडबैक भी ले रहे हैं। जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि भूपेंद्र यादव ने चुनाव की कमान संभाल रखी है। वे कई नेताओं व कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं। वहीं राज्य के वनमंत्री संजय शर्मा भी सक्रिय हैं। प्रत्याशी घोषित होते ही प्रचार तेज किया जाएगा।

मतदान के दिन सावा 

प्रदेश की 7 सीटों पर होने वाले उप चुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान होगा। जिसके लिए 12 नवंबर को पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी। लेकिन दोनों ही दिन शादियों का बड़ा सावा है। दरअसल, 13 को मतदान वाले दिन भी यही परेशानी होगी। इस दिन रामगढ़ क्षेत्र से जो बारातें बाहर जाएंगी, उसमें जाने वाले लोगों को मतदान कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

12 अक्टूबर को देवउठनी एकादशी

12 नवंबर को देवउठनी एकादशी का अबूझ सावा है। इस दिन से शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। अबूझ सावा होने की वजह से बम्पर शादियां भी होगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में इस दिन सर्वाधिक शादियां होती है। रामगढ़ इलाके से भी बड़ी संख्या में बारात अन्य जिलों या अलवर के ही अन्य क्षेत्रों में जाएंगी। ऐसे में बारात को लाने और ले जाने के लिए वाहनों की कमी भी हो सकती है।

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