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मध्यावधि चुनावः 30 साल बाद फिर अमरीकी राष्ट्रपति को दी महिलाओं ने मात

अमरीकी संसद के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने आठ साल बाद कांग्रेस के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में बहुमत हासिल किया है। पार्टी को 28 सीटों का फायदा हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिले इस बड़े झटके के पीछे महिलाओं की बड़ी भूमिका है।
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नई दिल्ली

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Amit Kumar Bajpai

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Updated: 9 Nov 2018, 11:21 AM IST

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ट्रंप के ट्वीट ने बनाई नाक की लड़ाई, भड़के यूरोपीय देश

वाशिंगटन। अमरीकी संसद के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने आठ साल बाद कांग्रेस के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में बहुमत हासिल किया है। पार्टी को 28 सीटों का फायदा हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिले इस बड़े झटके के पीछे महिलाओं की बड़ी भूमिका है। मतदान के बाद आए एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार महिलाओं ने ट्रंप के खिलाफ बढ़-चढ़कर मतदान किया।

प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इस उत्साह का नतीजा मतदान में 19 प्रतिशत के अंतर में दिखा। 59 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी जबकि 40 प्रतिशत ने रिपब्लिकन पार्टी को वोट दिए। मध्यावधि चुनाव में यह अब तक का सबसे बड़ा अंतर है।

ऐसे आंकड़े करीब 30 साल पहले देखने को मिले थे। तब 1982 में 58 प्रतिशत महिलाओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी और 41 प्रतिशत महिलाओं ने रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में मतदान किया था। शायद यही कारण है कि डेमोक्रेटिक नेता नैंसी पेलोसी ने वाशिंगटन में जीत के बाद अपने भाषण में मतदाताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि कल से एक नए अमरीका का निर्माण होगा।

महिलाओं ने बनाए कई रिकॉर्ड

इस चुनाव में 99 महिलाएं उम्मीदवार थीं। न्यूयॉर्क की 29 वर्षीय डेमोक्रेटिक प्रत्याशी अलेक्जेंडरिया ओकासिओ-कॉर्टेज कांग्रेस में पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की महिला बनी हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की इल्हान उमर और राशिदा तालिब पहली बार कांग्रेस में जगह बनाने वाली मुस्लिम महिलाएं हैं। कैंसस से शाराइस डेविड्स और न्यू मैक्सिको से डेब्रा हालांद उत्तरी-दक्षिणी अमरीका और कैरिबियन मूल की महिला हैं जो पहली बार कांग्रेस के लिए चुनी गई हैं।

दो प्रमुख असर

माना जा रहा है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला होगा। राष्ट्रपति ट्रंप को आव्रजन, कर और स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े कानूनों में अपने नीति के अनुसार बदलाव कांग्रेस से पारित करवाना अब आसान नहीं होगा।

हार के प्रमुख कारण

ट्रंप का नस्लवाद, झूठ बोलना, आक्रामक रुख गैर-शहरी लोगों को पसंद नहीं आया। ओबामाकेयर को लेकर ट्रंप के रुख का भी खामियाजा भुगतना पड़ा है। हाल ही में जज कैवनॉग मामले को लेकर अपनाए रुख पर भी महिलाओं का विरोध ट्रंप को देखना पड़ा।