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अमरीका ने बताया आधार पर SC के फैसला को संतुलित, कहा- अब भारत को निजता कानून की जरूरत

वाशिंगटन में मौजूद गैर लाभकारी संस्था थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट’ से जुड़े अनीत मुखर्जी समेत कई विशेषज्ञों ने इस संबंध में अपना बयान दिया।
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Shweta Singh

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Updated: 28 Sep 2018, 1:08 PM IST

US welcomes SC verdict on aadhar says now india needs privacy act

अमरीका ने बताया आधार पर SC के फैसला को संतुलित, कहा- अब भारत को निजता कानून की जरूरत

वाशिंगटन। आधार कार्ड की अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले का पूरे देश ने स्वागत किया। यहां तक कि देश की दो प्रमुख पार्टियां यानि भाजपा और कांग्रेस ने भी इस निर्णय पर सकारात्मक टिप्पणियां दी हैं। इसी बीच अमरीका ने इस फैसले पर अपनी राय रखी है। अमरीकी विशेषज्ञों ने इसे संतुलित बताया है।

अमरीकी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

मीडिया रिपोर्ट की माने तो अमरीकी विशेषज्ञों फैसले को संतुलित बताते हुए इस बात पर भी पूरा जोर दिया कि भारत को अब बिना देर किए डेटा शेयरिंग और निजता कानून पारित करने पर भी विचार करना चाहिए। बता दें कि वाशिंगटन में मौजूद गैर लाभकारी संस्था थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट’ से जुड़े अनीत मुखर्जी ने इस संबंध में अपने बयान में कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आधार मामले पर चली लंबी और सार्थक बहस का नतीजा है। जोकि एक लोकतांत्रिक देश का सबसे अच्छा तरीका होना चाहिए। हालांकि डेटा सुरक्षा और निजता कानून की दिशा में भारत को अभी और अधिक काम करने की जरूरत है।' डिजिटल आईडी के विशेषज्ञ मुखर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के बयान का हवाला देते हुए आगे कहा, 'जैसा कि जजों ने अपने फैसले के दौरान माना था कि सबसे अच्छा होने से बेहतर है अनन्य होना, लेकिन आधार दोनों ही मामलों में खरा साबित हो सकता है।'

'आने वाली चुनौतियों से बचने के लिए लागू हो निजता कानून'

मुखर्जी के अलावा वहां के सेंटर एलन गेल्ब और काइल नेविस से जुड़े दो अन्य विशेषज्ञों ने भी आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कोर्ट का ये फैसला उनके निजता पर दिए गए पिछले फैसले समानता और सिद्धांत पर आधारित है। इन विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि भविष्य में इस संबंध में आने वाली चुनौतियों पर गौर करें तो लगता है कि भारत को डेटा शेयरिंग समेत निजता कानून को पारित करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

2014 के बाद मिला था आधार को विस्तार

गौरतलब है कि आधार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही हाथों तक पहुंचाने के लिए लॉन्च किया था। हालांकि बाद में 2014 में सत्ता में आई मोदी सरकार ने आधार का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ये दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी जीत बता रहीं हैं।