
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नवम्बर 2017 तक जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने का लक्ष्य बनाकर पूरे सरकारी अमले ने जोर लगा रखा है। कर्मचारी से लेकर आला अधिकारी व जिले के मुखिया तक दौड़-धूप कर रहे हैं। कहीं प्रभात फेरियां, चौपालें लगाकर समझाइश तो कहीं नोटिस व चेतावनी के रूप में सख्ती। बावजूद इसके परिणाम उतनी गति से सामने नहीं आ रहे।
70 हजार टॉयलेट बनाने का था लक्ष्य
कोटा के नजदीक बारां के लोगों में शौचालय निर्माण को उदासीनता देखी गई। 2017 तक 70 हजार से अधिक शौचालय निर्माण लक्ष्य रखा गया था। इसकी तुलना में अब तक करीब साढ़े 18 हजार शौचालय ही बने हैं। 221 में से अब तक 83 पंचायतें ही ओडीएफ घोषित हुई है।
शहर में ही ठीक नहीं हाल
ग्रामीण-कस्बाई अंचल की छोडें तो बारां जिला मुख्यालय पर ही स्वच्छ भारत मिशन में उपलब्धि नहीं दिख रही। यहां नगरपरिषद क्षेत्र में साढ़े चार हजार करीब परिवार ऐसे हैं जो खुले में शौच की प्रवृत्ति में शामिल हैं। इन परिवारों के घरों में सरकारी योजना के तहत शौचालय निर्माण कराए जाने हैं, लेकिन अब तक करीब 600 ही बन पाए हैं जबकि 4000 से अधिक आशार्थियों को पहली किस्त जारी किए दिन हो गए।
किस्ते देने के बाद भी नहीं बने टॉयलेट
नगरपरिषद के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि करीब तीन हजार परिवार ऐसे हैं जिनको पहली किस्त जारी करने के बावजूद काम शुरू नहीं करा रहे। जिले में शौचालय निर्माण को लेकर प्रशासनिक प्रयासों के विपरीत जागरूकता की कमी साफ दिख रही है। कई जगह जहां शौचालय बने, तो उनका उपयोग नहीं हो रहा। लोग शौचालय निर्माण को लेकर उदासीनता दिखा रही हैं, जबकि अधिकारी समझाने में कसर नहीं छोड़ रहे।
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चल रहा है बैठकों का दौर
प्रशासन की ओर से अब सभी पंचायत मुख्यालयों पर सीनियर स्कूल के संस्था प्रधान को नोडल प्रभारी बनाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम सेवक, पटवारी, शिक्षक आदि कर्मचारियों को उनके अधीन करते हुए स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य पूरे करने को दौड़ाया जा रहा है। निर्धारित दिनों में बैठकें हो रही हैं, निर्माण संख्या अनुसार शौचालय बनवाने को लक्ष्य दिए जा रहे हैं। खुद जिला कलक्टर गांव-कस्बों में पहुंच रहे हैं। उनके अलावा एडीएम, सीईओ, एसीईओ, एसडीएम, तहसीलदार, विकास अधिकारी समेत अन्य अधिकारी भी दौड़ लगा रहे हैं।
लक्ष्य को ध्यान में रखकर कर रहे काम
जिला स्वच्छता समन्वयक कुलदीप सिंह ने कहा कि नवम्बर २०१७ तक जिले को ओडीएफ बनाने के लक्ष्य को लेकर काम किया जा रहा है। प्रयास पूरे हैं, परिणाम भी आ रहे हैं। शेष शौचालय भी बन जाएंगे। लोगों को समझाया जा रहा है। जहां शौचालय बन गए, उनके उपयोग को लेकर भी टीम मॉनिटरिंग कर रही है।