
Brij Bhushan Case: बृजभूषण शरण सिंह केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के 239 पन्नों के फैसले के अहम हिस्से सामने आए हैं। अदालत ने महिला पहलवानों के बयानों में कथित घटना की जगह, देश और साल को लेकर सामने आए अंतर को अहम माना। कोर्ट ने कहा कि यह विरोधाभास अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर करता है और गवाह की विश्वसनीयता पर असर डालता है, क्योंकि यौन उत्पीड़न की कथित घटना जिस स्थान पर हुई थी, उसे याद न रख पाना कोई सामान्य बात नहीं, बल्कि असाधारण व्यवहार है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्वनी पंवार ने 3 अगस्त को दिए अपने 239 पन्नों के फैसले में कहा कि सभी पीड़िताओं ने बताया था कि करियर खत्म होने के डर से उन्होंने आरोपी के खिलाफ समय रहते आरोप नहीं लगाए। हालांकि, अदालत ने कहा कि जब उन्होंने आरोप लगाने की हिम्मत जुटाई तो घटना के स्थान या देश और साल के बारे में गलत जानकारी दी।
कोर्ट ने इसे अभियोजन पक्ष के मामले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने वाला अहम पहलू माना। अदालत के मुताबिक, कथित यौन उत्पीड़न की घटना कहां हुई थी, इसे याद न रख पाना सामान्य बात नहीं है।
अदालत ने कहा कि गवाहों के शुरुआती बयानों में घटनाओं के स्थान, देश और साल को लेकर जो जानकारी दी गई थी, बाद में उसमें बदलाव किया गया। कोर्ट ने इस बदलाव को अभियोजन की कहानी के लिए गंभीर माना। फैसले में कहा गया कि यह विरोधाभास अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर करता है और गवाह की विश्वसनीयता पर असर डालता है।
अदालत ने शिकायतकर्ता पहलवानों के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि करियर खत्म होने के डर से उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ समय पर शिकायत नहीं की। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा डर था तो उन्होंने बृजभूषण के साथ सालों तक सौहार्दपूर्ण (अच्छे रिश्ते) कैसे बनाए रखे। फैसले में यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता पहलवानों ने बृजभूषण को पारिवारिक आयोजनों और शादी समारोहों में भी बुलाया था। अदालत ने इन परिस्थितियों को भी मामले की जांच के दौरान महत्वपूर्ण माना।
फैसले में अदालत ने कहा कि महिला पहलवानों ने पहली यौन उत्पीड़न की घटना के संबंध में गलत देश और साल का जिक्र किया। कोर्ट के मुताबिक, इससे लगाए गए आरोपों पर सवाल उठता है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोप झूठे और मनगढ़ंत थे तथा दो अन्य शिकायतकर्ता पहलवानों और महादेव अकादमी के कोच के कहने पर आरोपी के खिलाफ राजनीति से जुड़े गहरी साजिश के तहत लगाए गए थे। इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को मामले में बरी कर दिया।