
अमेरिका द्वारा ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर किए गए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। इस मामले ने अब एक राजनीतिक रूप ले लिया है और विपक्ष लगातार इसे लेकर सरकार को घेर रहा है। इसी बीच आंध्र प्रदेश कांग्रेस के तेलंगाना सांसद गद्दम वंसी कृष्णा ने इस घटना पर चुप्पी को लेकर NDA सरकार के नेताओं से सवाल किया है। कृष्णा ने पवन कल्याण और नारा लोकेश से सवाल करते हुए पूछा कि क्या वे सिर्फ अपने पद बचाने के लिए केंद्र सरकार का समर्थन कर रहे हैं। बता दें कि, अमेरिका के इस हमले में मारे गए तीन भारतीयों में से एक मरीन इंजीनियर पतनाला सुरेश विशाखापट्टनम के रहने वाले थे।
कांग्रेस सांसद गद्दम वंसी कृष्णा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जन सेना पार्टी (JSP) नेताओं की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत हुई, लेकिन राज्य सरकार के प्रमुख नेताओं ने अब तक कोई संवेदना तक व्यक्त नहीं की। सांसद ने लिखा कि लोकेश गरु, पवन कल्याण गरु, क्या आप सिर्फ अपने पदों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार का समर्थन कर रहे हैं? उन्होंने आगे लिखा कि नैतिक मूल्यों को पूरी तरह भूल जाना उचित नहीं माना जा सकता। कांग्रेस सांसद ने यह भी याद दिलाया कि पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा की गई थी, लेकिन उसके बाद हुई घटनाओं पर अब सन्नाटा क्यों है।
पालाउ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर ओमान तट के पास हमला हुआ था। यह इलाका होर्मुज स्ट्रेट के बेहद रणनीतिक क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने उस जहाज पर कार्रवाई की, क्योंकि उस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप था। इस हमले में चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई। पहले इन तीनों के लापता होने की खबर आई थी, लेकिन बाद में उनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी गई। सुरेश विशाखापट्टनम के रहने वाले थे और अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। परिवार इस खबर के बाद से गहरे सदमे में है।
घटना के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण या राज्य सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि जब भारतीय नागरिक विदेश में मारे जाते हैं तो राज्य और केंद्र सरकार दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे परिवार के साथ खड़े दिखाई दें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे संवेदनशील राष्ट्रीय विषय से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।