सीएए व एनआरसी को लेकर भारत बंद की अपील बुधवार को की गई है। इसका रतलाम में मिलाजुला असर सुबह से देखने को मिल रहा है। समुदाय विशेष के मोहल्लों में कामकाज ठप है व सुबह से दुकाने नहीं खुली है। दूसरी तरफ लोकल परिचालन मैजिक व ऑटो भी कम चल रहे है। मंडी में हम्माल एसोसिएशन ने बंद को समर्थन दिया है। शहर में प्रमुख स्थान पर पुलिस बल तैनात है व मोबाइल पेट्रोलिंग चल रही है।

रतलाम। सीएए व एनआरसी को लेकर भारत बंद की अपील बुधवार को की गई है। इसका रतलाम में मिलाजुला असर सुबह से देखने को मिल रहा है। समुदाय विशेष के मोहल्लों में कामकाज ठप है व सुबह से दुकाने नहीं खुली है। दूसरी तरफ लोकल परिचालन मैजिक व ऑटो भी कम चल रहे है। मंडी में हम्माल एसोसिएशन ने बंद को समर्थन दिया है। शहर में प्रमुख स्थान पर पुलिस बल तैनात है व मोबाइल पेट्रोलिंग चल रही है। इन सब के बीच रतलाम के अशोक नगर में धरने का चौथा दिन दिल्ली के शाहीदबाग की तरह जारी है।
शहर के अशोक नगर में तीन दिन में सीएए व एनआरसी के विरोध में चल रहा धरना बुधवार को भी जारी रहा। यहां पर 80 साल की मेहरूनीसा भी बड़चढ़कर आंदोलन में भाग ले रही है। सवाल करने पर बताती है कि जब सात साल की थी, तब पिता सैय्यद मोहम्मद अली आजादी के आंदोलन में जेल गए थे। तब महात्मा गांधी ने पत्र लिखकर शाबाशी दी थी। तब से अब तक वक्त नहीं बदला, पहले अंगे्रज जुल्म करते थे, अब सियासत में बैठे लोग जुल्म कर रहे है। मेहरूनीसा ने बताया कि जब वे सात साल की थी, तब उनके पिता को जेल हुई थी। अधिक तो अब याद नहीं है, लेकिन यह याद है कि वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे इसलिए उनको आजादी की लड़ाई में जेल भेज दिया गया था। उस वक्त महात्मा गांधी का आंदोलन में लड़ाई लडऩे का पत्र भी आया था। अब वे इस आंदोलन में तीन दिन से डटी हुई है।
गूंज रहे लेकर रहेंगे आजादी के नारे
आंदोलन में सुबह से लेकर देर रात तक सीएए से लेकर रहेंगे आजादी, एनआरसी से लेकर रहेंगे आजादी जैसे नारे लग रहे है। रास्ता ब्लॉक नहीं हो, इसके लिए मोहल्ले के युवक ही यातायात व्यवस्था को संभाले हुए है। यहां पर भोजन भी बनता है और आंदोलन में शामिल लोग ही मिलजुलकर साथ बैठकर खाते है। भोजन की व्यवस्था कैसे हो रही है, सवाल करने पर अरशद बेलिम का कहना है कि जो धरने पर आए है, उनमे से कोई आटा ला रहा है तो कोई मटर। कोई प्याज ला रहा है तो कोई आलू। सब मिलकर भोजन बनाते है।
पत्रिका में पढ़ा तो मदद को आए
आंदोलन में शामिल निसार उस्ताद, मोहम्मद इमरान व अन्नु आपा के अनुसार वे पत्रिका में खबर पढ़कर आंदोलन में आए। यहां पर हम लोगों के लिए भोजन बनाने के काम में मदद कर रहे है। आंदोलन में व्यवस्था देखने वाले इमरान खोकर के अनुसार तीन दिन में 10 हजार से अधिक लोग का भोजन हुआ। करीब इतने ही लोग अलग-अलग समय में आंदोलन में शामिल हो रहे है।
हम अंतिम सांस तक लडे़ंगे
अंादोलन में महिलाओं का नेतृत्व कर रही फातिमा के अनुसार अंतिम सांस तक लड़ाई जारी रहेगी। विरोध का कारण सिर्फ यह है कि इसमे पीएम से लेकर गृहमंत्री तक कह रहे है कि मुसलमान को प्रताडि़त होने पर शरण नहीं देंगे, जबकि प्रताडित तो कोई भी हो सकता है। इन सब के बीच आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है व लेकर रहेंगे आजादी के नारे लगातार गूंज रहे है।