ढाका। बांग्लादेश में शरणार्थी बन कर रह रहे म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमानों पर अब एक बार फिर से दुख का पहाड़ टूटा है। इस बार कोई इंसानी गलतियों की वजह से उन्हें दुख झेलना नहीं पड़ रहा है बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण उन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। मानसूनी बारिश के कारण रोहिंग्या मुसलमानों के पास सिर छुपाने की जगह नहीं बची है। पहाड़ी पर बनी कच्ची झोपड़ियां बारिश और उसके कारण लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण रहने लायक नहीं बची हैं। बारिश का पानी, गाद और जमीन धसने से उनकी झोपड़ियां टूट रही हैं, उनके जान पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। इसलिए अब वे वहां से दूर निकल कर नए जगह की तलाश में भटक रहे हैं।