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अराजकता की राह पर मालदीव, तानाशाही की ओर लौटने का डर

ये शंकाएं निराधार नहीं हैं, इसके पीछे कई मजबूत और वाजिब वजहें हैं
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नई दिल्ली

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Siddharth Priyadarshi

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Updated: 30 Aug 2018, 8:29 AM IST

maldives

अराजकता की राह पर मालदीव, तानाशाही की ओर लौटने का डर

माले। हिंद महासागर में स्थित द्वीपीय देश मालदीव के तानाशाही वाले दिनों में लौटने की संभावनाएं प्रबल होती जा रही हैं। वर्तमान हालात के चलते इस देश में काफी अनिश्चितता बनी हुई है। माना जा रहा है कि अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के बाद मालदीव की राजनीति किसी भी तरफ जा सकती है। यहां स्वतंत्र और निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनाव होने पर भी शंकाएं जताई जाने लगी हैं। कहा जा रहा है कि ये शंकाएं निराधार नहीं हैं, इसके पीछे कई मजबूत और वाजिब वजहें हैं।

क्या तानाशाही की और बढ़ रहा है मालदीव

मालदीव की राजनीति के कई जानकारों ने दावा किया है कि मालदीव धीरे-धीरे एक तानाशाही में वापस आ रहा है। यूएस में रह रहे मालदीव के एक ब्लॉगर ने अपने आर्टिकल में लिखा है, "हम वापस एक पुराने शासक वर्ग के चंगुल में हैं। हमने अपने सभी अधिकारों को लगभग खो दिया है जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असेंबली की स्वतंत्रता। हमने अच्छी प्रशासनिक संरचनाओं को खो दिया है जिनकी हमने आशा की थी। लेकिन अगर हमने सितम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को मुक्त और निष्पक्ष बना दिया तो हम इनके माध्यम से राष्ट्र को फिर से पुनर्जीवित कर सकते हैं।"

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदले हालात

बीते दिनों मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी राजनीतिक कैदियों को मुक्त कर दिया जाय। लेकिन इस निर्णय का पालन करने के बजाय राष्ट्रपति यमीन ने आपातकाल लगा दिया और यहीं से सबकुछ बदल गया। अपने इस कृत्य के बाद यामीन को महाभियोग लगाकर पद से हटाया जा सकता था लेकिन यह सम्भव नहीं हो पाया। राष्ट्रपति यमीन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न्यायिक विद्रोह माना और 15 दिनों की आपात स्थिति घोषित कर दी। ऐसा करने के लिए सुरक्षा बलों को सुप्रीम कोर्ट में घुसने और दो न्यायाधीशों को गिरफ्तार करने का अधिकार मिल गया। हालांकि अमरीका, यूरोप, भारत और अन्य सरकारों ने इस स्थिति की निंदा की और यमीन को मूल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने का आग्रह किया। लेकिन इसको नजरअंदाज करते हुए यमीन ने अपने रुख में कोई परिवर्तन नहीं किया। यही नहीं देश के पुलिस आयुक्त को उस बयान के बाद, जिसमे उन्होंने कहा कि वह अदालत के आदेश का पालन करेंगे और अपने राष्ट्रपति के भाई मौमून अब्दुल कयूम को भी गिरफ्तार करेंगे, पद से हटा दिया गया।

पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट

पर्यटन मालदीव की अर्थव्यवस्था के केंद्र में है। यह देश एक पर्यटक गंतव्य के रूप में जाना जाता है। बीते दिनों मालदीव को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा क्योंकि भारत और चीन समेत दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को इस द्वीप से बचने और अनिवार्य यात्रा को रोकने के निर्देश दिए थे। यहां तक कि ब्रिटेन और अमरीकी सरकारों न भी कहा कि वह मालदीव की स्थिति से निराश हैं।

उधर देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद, जो अब श्रीलंका में निर्वासन में रहते हैं, ने कहा कि वे जानते हैं कि राष्ट्रपति यामीन चुनाव जीतने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारे पास वोट होगा और हम यह भी जानते हैं कि राष्ट्रपति यमीन चुनाव जीतने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि "यमीन ने न केवल देश को आंतरिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। बल्कि सत्ता में आने के अपने प्रयास में उन्होंने देश को बाहरी दुनिया में भी काफी बदनाम कर दिया हैं। यह एक अपरिवर्तनीय क्षति है।"