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नॉर्थ कोरिया का आरोप, साउथ कोरिया को उकसाने का प्रयास कर रहा अमरीका

ओलम्पिक खेलों के तुरंत बाद नॉर्थ कोरिया के खिलाफ आक्रामक सैन्य अभ्यास करेगा अमरीका  
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Mohit sharma

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Updated: 2 Feb 2018, 6:12 PM IST

South Korea

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री री योंग हो ने अमेरिका पर कोरियाई प्रायद्वीप के दोनों देशों के बीच की सुलह प्रक्रिया को कमजोर और स्थिति को उत्तेजक बनाने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से कहा कि री ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को भेजे अपने पत्र में कहा है कि अंतर कोरियाई संवाद से अच्छे परिणाम निकले हैं और कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव घटाने के प्रयास का अंतर्राष्ट्रीय समाज ने स्वागत किया है।

नॉर्थ कोरिया पर भड़का अमरीका

री ने कहा कि अमरीकी प्रशासन हालांकि कोरियाई प्रायद्वीप के पास परमाणु शक्ति वाले विमानों को भेज कर जानबूझकर स्थिति को उस समय उत्तेजक कर रहा है, जब दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच सुलह हो रही है। वहीं, अमरीका ने खुल कर कहा है कि वह शीतकालीन ओलम्पिक खेलों के तुरंत बाद उत्तर कोरिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर आक्रामक संयुक्त सैन्य अभ्यास करेगा। री ने संयुक्त राष्ट्र से कोरियाई प्रायद्वीप के चारों ओर और साथ ही दुनिया भर में परमाणु युद्ध की बढ़ती संभावित स्थिति को उत्तेजक करने के प्रयास पर 'खामोश न रहने' का आह्वान किया है।

क्या है अमरीका-नॉर्थ कोरिया विवाद

बता दें कि अमरीका और नॉर्थ कोरिया के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। जिसका सबसे बड़ा कारण नॉर्थ कोरिया की ओर से किए गए छह परमाणु परीक्षण और अमरीका को दी जा रही लगातार युद्ध की धमकी है। प्योंगयांग ने ऐसी मिसाइलों को परीक्षण किया है, जिनकी मारक क्षमता अमरीका के कई बड़े शहरों तक है। इसके साथ ही प्योंगयांग के नेता किम जोंग उन ने गुआम प्रायद्वीप को उड़ाने की धमकी दी है। यह प्रायद्वीप अमरीका की टैरेट्री है, जिस पर अमरीका के कई सन्य बेस और 10 हजार से अधिक सैनिक तैनात हैं। यही नहीं यहां लाखों की संख्या में अमरीकी नागरिक भी रहते हैं। गुआम नॉर्थकोरिया की सीधी एप्रोच में होने के कारण अमरीका आक्रमक मोड़ में आ गया था, जिसके चलते अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएन महासभा के सम्मेलन के दौरान नॉर्थ कोरिया में बमबारी की चेतावनी दी थी। यही नहीं इसके साथ ही अमरीका और संयुक्त राष्ट्र के कहने पर चीन समेत कई देशों ने नॉर्थ कोरिया पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दी दिए थे। जिसको देखते हुए दोनों देशों के बीच युद्ध की संभावनाएं प्रबल हो गई थी।