5 नवंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

यू विन मिंत होंगे म्यामांर के अगले राष्ट्रपति

आंग सान सूची के करीबी माने जाते हैं । पूर्व राष्ट्रपति ह्तिन क्याव ने आराम की जरूरत बताते हुए पिछले हफ्ते पद छोड़ दिया था।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Siddharth Priyadarshi

•

Updated: 28 Mar 2018, 3:26 PM IST

U Myint

म्यांमार : यू विन मिंत को म्यांमार का नया राष्ट्रपति चुन लिया है। देश की संसद ने आज उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया है। विन मिंत वर्तमान में सेना के साथ साझा सरकार चला रहीं म्यामांर की प्रतिष्ठित नेता आंग सान सूची के बेहद करीबी मानें जाते हैं। पिछले सप्ताह ही ह्तिन क्याव ने राष्ट्रपति पद से त्याग पत्र दे दिया था। अपने चुनाव के साथ ही विन मिंत की देश के शीर्ष स्तरीय नीति-निर्धारण प्रक्रिया पर अपनी पकड़ बरकार रखे हुए हैं।

देश की संसद के स्पीकर थे यू मिंत

विन मिंत इससे पहले निचली सदन के स्पीकर रह चुके हैं । उन्होने इसी महीने 22 मार्च को पद से इस्तीफा दिया था। बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति ह्तिन क्याव ने आराम की जरूरत बताते हुए पिछले हफ्ते पद छोड़ दिया था । इसके बाद विन मिंत को इस पद के लिए चुना गया है। विन मिंत देश के ताक़तवर नेताओं में रहे हैं । नीति सम्बन्धी मामलों मेँ उनका प्रशासनिक अनुभव बहुत लम्बा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक विन मिंत ने 22 मार्च को निचली सदन के स्पीकर से इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देने के बाद से ही इस बात की अटकलें तेज थी कि मिंत राष्ट्रपति के लिए चुने जा सकते हैं । म्यांमार संसद के अध्यक्ष मान विन खाइंग थान ने कहा, ‘मैं घोषणा करता हूं कि बहुमत पाने वाले यू विन मिंत को देश का राष्ट्रपति निर्वाचित किया जाता है.’

सत्ता पर सूकी की पकड़ कायम

सेना द्वारा तैयार किए गए संविधान के तहत आंग सांग सूकी के राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित होने पर रोक लगी है, क्योंकि उन्होंने एक विदेशी मूल के व्यक्ति से विवाह किया है।। उनके दो बेटे हैं जो ब्रिटेन के नागरिक हैं। वह 2015 में अपनी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद से स्टेट काउंसलर हैं और घोषणा कर चुकी हैं कि वे राष्ट्रपति से ऊपर रहते हुए काम करेंगी। फिलहाल सूकी की सरकार मेँ कोई आधिकारिक संवैधानिक भूमिका नहीं है। इससे सू की के लिए अपनी किसी करीबी को राष्ट्रपति बनाना जरूरी था ताकि वह परदे के पीछे से सहजतापूर्वक देश पर शासन कर सकें ।