
स्थायी संपत्ति खरीदना का सबसे शुभ योग पुष्य नक्षत्र Image AI Grok
Pushya : वैदिक ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ बताया गया है। इस बार पितृ पक्ष (अश्विन मास) में यह नक्षत्र पड़ रहा है। पंचांगों के अनुसार 4-5 अक्टूबर की दरमियानी रात 12.14 बजे पुष्य नक्षत्र शुरू हो जाएगा। यह 5 अक्टूबर की रात 11:09 बजे तक रहेगा। इस प्रकार सोमवार के दिन सुबह से लेकर रात तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस नक्षत्र में सोना-चांदी खरीदना शुभ माना गया है जबकि इस अवधि में पूजा पाठ करना भी बहुत फलदायी साबित होता है। 5 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र के साथ बन रहे योग स्थायी संपत्ति दिला सकते हैं। मेष, कर्क और धनु राशियों को खासा लाभ हो सकता है।
ज्योतिषिय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवजी की पूजा करना चाहिए। पुष्य नक्षत्र में गंगाजल व शहद से शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। ऋग्वेद में भी इसका महत्व बताया गया है। इसमें पुष्य नक्षत्र को आनंदकर्ता, मंगलकर्ता और वृद्धिकर्ता कहा गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि सप्ताह के अलग-अलग वारों के साथ मिलकर पुष्य नक्षत्र विशेष योग बनाता है। सोमवार को पुष्य नक्षत्र आने पर सोम पुष्य, मंगलवार को आने पर भौम पुष्य, बुधवार को बुध पुष्य, गुरुवार को आने पर गुरु पुष्य, शुक्र को आने पर शुक्र पुष्य, शनि को आने पर शनि पुष्य और रवि को आने पर रवि पुष्य योग बनता है। पुष्य नक्षत्र से बनने वाले इन सभी योगों का विशेष महत्व होता है।
हालांकि पुष्य नक्षत्र सर्वाधिक शुभ फलदायी कहा गया है पर बुधवार और शुक्रवार के दिन पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र को कुछ ग्रंथों में अशुभकारी बताया गया है। इस नक्षत्र से बनने वाले योगों में गुरु पुष्य, शनि पुष्य तथा रवि पुष्य योग सबसे श्रेष्ठ बताए गए हैं। इन योगों में सोना, चांदी या स्थाई संपत्ति खरीदना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जोकि सोना के कारक माने जाते हैं और नक्षत्र स्वामी शनि हैं जोकि स्थायित्व प्रदान करते हैं। यही कारण है कि इस दिन सोना खरीदना शुभ और स्थायी होता है। खासतौर पर शनि पुष्य या गुरु पुष्य नक्षत्र में सोना, वाहन, मकान या जमीन जरूर खरीदना चाहिए। ये खरीदी चिरस्थायी साबित होती हैं। पुष्य नक्षत्र पर गुरु और शनि के अलावा चंद्रमा का भी प्रभाव होता है इसलिए चांदी के जेवर भी खरीदे जा सकते हैं।
पुष्य नक्षत्र में शनि की उपासना भी बहुत फलदायी होती है। ज्योतिष के अनुसार इस अवधि में शनि के निमित्त दान, पुण्य करने से लाभ अवश्य मिलता है। इसलिए शनिदेव की पूजा जरूर करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार शनिदेव को प्रसन्न कर उनका प्रकोप शांत करने के लिए पुष्य नक्षत्र सबसे अच्छा माना जाता है। यह शनि की कृपा दिलाने वाला योग है। शनि की साढ़ेसाती, ढैया या शनि महादशा-अंतरदशा से परेशान लोगों को पुष्य नक्षत्र में शनि देव की पूजा-अर्चना त्वरित राहत प्रदान करती है।
Updated on:
04 Oct 2026 02:14 pm
Published on:
04 Oct 2026 02:14 pm
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