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राम मंदिर आंदोलन के ऐतिहासिक सच का खुलासा! चंपत राय बोले- 1989 में दलित कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल ने रखी थी पहली ईंट

Champat Rai: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने 1989 में कामेश्वर चौपाल द्वारा शिलान्यास, 2001 कुंभ में दलाई लामा-शंकराचार्य के ऐतिहासिक मंच और वीएचपी की धर्म संसद के इतिहास पर कई बड़े खुलासे किए।
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Champat Rai

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Photo ANI)

Champat Rai Statement Ram Mandir History: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रसंगों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि 9 नवंबर 1989 को राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास के समय यह सवाल उठा था कि पहली ईंट किसके हाथों रखवाई जाए। रामचंद्र परमहंस जी और महंत अवैद्यनाथ जी जैसे कई दिग्गज संत इसके लिए तैयार थे, लेकिन विश्व हिंदू परिषद ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। बिहार के सुपौल के रहने वाले और अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले वीएचपी कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल को इसके लिए चुना गया। कामेश्वर चौपाल के हाथों ही राम मंदिर का पहला शिलान्यास संपन्न हुआ था।

2001 कुंभ: दलाई लामा और शंकराचार्य का ऐतिहासिक मंच

चंपत राय ने बौद्ध और हिंदू समाज के बीच दार्शनिक और सामाजिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए 2001 के प्रयागराज कुंभ मेला का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि कुंभ में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य को एक ही मंच पर आमंत्रित किया गया था। दोनों महान धर्मगुरुओं ने एक साथ बैठकर एक संयुक्त बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि भले ही हमारी दार्शनिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन बौद्ध और शेष हिंदू समाज के सामने मौजूद चुनौतियां एक समान हैं।

धर्म संसद और 15,000 संतों का अभूतपूर्व महाजुटान

विश्व हिंदू परिषद द्वारा संतों को एकजुट करने के प्रयासों का जिक्र करते हुए चंपत राय ने कहा कि शुरुआत में इस आंदोलन में संतों की भागीदारी सीमित थी, लेकिन बाद में इसे कई गुना बढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि देश में एक ही स्थान पर सभी संतों के रुकने की व्यवस्था संभव न होने के कारण 6 अलग-अलग स्थानों पर संत सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिन्हें 'धर्म संसद' का नाम दिया गया। इन छह स्थानों पर लगभग 15,000 संत एक साथ आए और श्री राम जन्मभूमि को माध्यम बनाकर पूरे देश में एक अभूतपूर्व जन-जागरण आंदोलन खड़ा किया गया।

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