
अयोध्या राम मंदिर फाइल फोटो सोर्स पत्रिका
Uttar Pradesh, Assembly Election: अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को पुलिस की ओर से क्लीन चिट दिए जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने जांच को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच पूरी हो चुकी है। आलोक कुमार ने कहा कि मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इसे साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा हो।
सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर एसआईटी का पुनर्गठन हुआ और फोरेंसिक ऑडिटर भी नियुक्त किया गया। जांच के बाद 73 हजार पन्नों की रिपोर्ट आई है और दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
जांच में राम मंदिर के चढ़ावा गिनने वाले कक्ष से नकदी निकालने या छिपाने से जुड़ी 105 घटनाओं का जिक्र सामने आया है। इसके अलावा CCTV फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, फॉरेंसिक जांच और गवाहों के बयान भी जांच का हिस्सा रहे। चार्जशीट में करीब 3,300 संदेशों की जांच का भी उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद सवाल यह है कि चढ़ावे की गिनती से लेकर बैंक में रकम जमा होने तक जिन लोगों की जिम्मेदारी तय थी, उनमें से किसकी जवाबदेही तय हुई।
चार्जशीट में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को आरोपी बनाया गया है। ये वही आठ लोग हैं, जिनके नाम 25 जून को दर्ज FIR में भी थे। इनमें सुभाष श्रीवास्तव सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी हैं और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े रहे थे। उनके खिलाफ भी जांच की गई और उन्हें आरोपियों में शामिल किया गया है।
अयोध्या पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, बैंक कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और रकम को बैंक में जमा कराने की थी। शुरुआती जांच में गिनती की व्यवस्था और बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर कुछ कमियां सामने आई थीं।
बताया गया कि गिनती करने वाले कर्मचारियों के साथ बैंक अधिकारियों की ड्यूटी भी बारी-बारी से लगनी थी। बैंक अधिकारियों को यह देखना था कि गिनती करने वाले कर्मचारी तय यूनिफॉर्म में रहें। लेकिन यह व्यवस्था लागू नहीं होने की बात जांच में सामने आई। इसके बावजूद बैंक के कम से कम दो कर्मचारियों को चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाया गया।
चार्जशीट में ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी आरोपी नहीं बनाया गया है। शुरुआती जांच में इनकी भूमिकाओं की भी पड़ताल हुई थी। बाद में चंपत राय और अनिल मिश्रा ने महासचिव और ट्रस्टी के पद से इस्तीफा दे दिया। अयोध्या के SSP और SIT के सदस्य गौरव ग्रोवर ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को सरकारी गवाह बनाए जाने की चर्चा को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मामले में 173 लोगों को गवाह बनाया गया है और इनमें राय और मिश्रा भी शामिल हैं। लेकिन दोनों में से किसी को सरकारी गवाह या अप्रूवर नहीं बनाया गया है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दूसरी SIT बनाई थी। इसमें लखनऊ रेंज की IG किरण एस, अयोध्या रेंज के DIG सोमन वर्मा और अयोध्या के SSP गौरव ग्रोवर शामिल हैं। इससे पहले 13 जून को ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चढ़ावे की चोरी की SIT जांच कराने की मांग की थी।
पहली FIR 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुई थी। इसमें वही आठ लोग नामजद थे, जिन्हें बाद में गिरफ्तार किया गया। शुरुआती SIT रिपोर्ट में चंपत राय को क्लीन चिट दी गई थी, जबकि अनिल मिश्रा और कुछ बैंक कर्मचारी जांच के दायरे में रहे थे।
Updated on:
26 Sept 2026 02:16 pm
Published on:
26 Sept 2026 02:00 pm
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