
बहराइच. चितौड़ गढ़ की महारानी पद्मावती के इतिहास पर संजय लीला भंसाली द्वारा फिल्माई गयी पद्मावती फ़िल्म ने सिनेमा थियेटर में लगने से पहले ही पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा कर दिया है। आप को बता दें की इस समय पूरे भारत वर्ष में हर जगह फ़िल्म निर्माता संजय लीला भंसाली द्वारा निर्मित पद्मावती फ़िल्म का विरोध बड़े जोर शोर के साथ दिखाई दे रहा है। हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों का आरोप है की ख़िलजी शासन काल में चित्तौड़ गढ़ की महारानी पद्मावती ने 16 हजार महिलाओं के साथ जौहर करने का काम किया था। जिनके चरित्र व इतिहास के साथ इस फ़िल्म में आरोपी फ़िल्म निर्माता ने अपने निजी फायदे के लिये जमकर छेड़छाड़ किया गया है। जिसको लेकर क्षत्रिय समाज के साथ ही पूरा हिन्दू समाज एक सुर में अपना विरोध जता रहा है।
कभी जोधा अकबर, तो कभी बाजी राव मस्तानी के बाद अब रानी पद्मावती जैसी वीरांगना महिलाओं के बलिदान को धता बताते हुए फ़िल्मी कहानियों के जरिये नारी समाज की गरिमा को बुरी तरह तार तार करने का काम किया जा रहा।फ़िल्मी दुनियां से जुड़े लोग अपने व्यवसायिक फायदे के लिये राजपूताना इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर नारी समाज को शर्मसार करने में भी जरा नहीं हिचकिचा रहे,इसको लेकर लोगों का गुस्सा इस कदर भड़क गया है की लोग सड़क पर उतर कर अपना विरोध प्रदर्शन कर पद्मावती फ़िल्म के अंदर से फिल्माए गए विवादित दृश्यों को हटाने की मांग पर अंड़े हुए हैं।
इस अहम मामले के सवाल पर यूपी सरकार के कैबिनेट श्रम एवम सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपना तर्क जाहिर करते हुए कहा की पद्मावती फ़िल्म के विवादित प्रकरण के मामले में आम जनता की भावनाओं का ख्याल रखते हुए सेंसर बोर्ड को अपनी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। आम जनता को इस मसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, सेंसर बोर्ड को इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए की किसी की भावनाएं आहत न होने पाये। आगे आकर सेंसर बोर्ड को इसकी जिम्मेदारी निभाकर आवाम को सूचित करना चाहिए। कुछ इस तरह बहराइच जिले में दौरे पर आये योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने पद्मावती फ़िल्म के ज्वलन्त मुद्दे पर अपनी राय को जाहिर किया।
Published on:
23 Nov 2017, 8:58 AM IST
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