
बालोद जिले में बीते कुछ दिनों से मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। शनिवार शाम एक बार फिर तेज हवा ने जमकर तबाही मचाई। जगन्नाथपुर में कुर्मी समाज के सामाजिक कार्यक्रम के लिए लगाया गया पंडाल भी तेज हवा से गिर गया, जिससे संचालक को काफ़ी नुकसान हुआ है। कई पेड़ टूटे तो बिजली के पोल भी टूटे, जिससे कई गांवों में बिजली बंद रही। वहीं आंधी से पेड़ गिरने व टिन शेड उडऩे से तीन महिलाएं बुरी तरह से घायल हो गईं। तीनों के सिर पर चोट आई है। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। वहीं एक महिला को गंभीर चोट आने के कारण दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। बीते तीन दिन से शाम को अचानक मौसम बदल रहा है और आंधी के साथ बारिश हो रही है। वहीं इस बारिश व तेज हवा से फसलों को भी काफ़ी नुकसान हुआ है।
जिले के ग्राम भाठागांव में भारती धनकर उम्र 40 साल के सिर पर आंधी से गांव के एक घर का सीमेंट शीट उड़कर आया और टकरा गया। इस घटना से भारती के सिर पर गंभीर चोट आई, जिसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। परिजनों के मुताबिक यह घटना शाम 4 बजे की है।
शाम 4.30 बजे करीब तेज आंधी से कई पेड़ गिरे। वहीं ग्राम भोइनापार में उतरा बाई 35 साल अपने गांव के सड़क में चल रही थी। उसी समय सड़क किनारे पेड़ की एक शाखा टूटकर महिला के सिर पर गिरी। इस घटना में महिला के गले में अंदरूनी चोट आई। वहीं घटना के बाद महिला लगभग आधे घंटे तक बेहोश रही। महिला को गंभीर हालात में संजीवनी 108 से जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया पर चोट गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया।
शाम 4 बजे करीब ही जिले के ग्राम घुमका में तेज हवा चलने से अंबिका बाई के घर के छत के ऊपर रखा लकड़ी का दरवाजा 66 साल की अंबिका बाई के सिर पर गिर गया। इस घटना से वो घायल हो गई। घायल वृद्ध महिला को जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
बालोद जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम जगन्नाथपुर में दो दिवसीय दिल्लीवार क्षत्रिय कुर्मी समाज के 55वें महाधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन के पहले दिन शनिवार को तेज अंधड़ और हल्की बारिश ने ऐसी तबाही मचाई कि आयोजकों को लाखों का नुकसान हो गया। लगभग 3 एकड़ क्षेत्रफल में बाजार चौक के पास बनाया गया पंडाल और स्टेज उड़ गया। बिजली के तार टूट गए। गनीमत रही कि अंधड़ शुरू होते ही बिजली बंद कर दी गई थी। वरना बड़ा हादसा हो जाता। लोगों के अनुसार जगह-जगह बिजली के तार टूटे हुए थे। भारी भरकम कूलर तक हवा के तेज बहाव से गिरे पड़े थे। तो वहीं पंडाल के लोहे के एंगल धराशाई हो गए।
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Updated on:
03 May 2025 11:29 pm
Published on:
03 May 2025 11:29 pm
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