
आचार्य रामचंद्र ने किया विरोधों का सामना
मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के महावीर भवन में आचार्य रामचंद्र सूरीश्वर की 27वीं पुण्यतिथि के अंतिम दिन आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि उन्होंने 96 वर्ष के अपने जीवन में अनेक संघर्ष और विरोधों को सहन किया था। उन्होंने कहा कि आचार्य को बचपन में जब दीक्षा की अनुमति नहीं मिली तो गंधार तीर्थ में जाकर गुप्त रूप से दीक्षा स्वीकार की। दीक्षा के समय मात्र दो लोग मौजूद थे। सभा के दौरान आचार्य की प्रतिकृति का सामूहिक गुरुवंदन, गुरु स्तुति गान एवं मंगलाचरण किया गया।
छोटी बात को बड़ा ना बनाएं
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में सिटी स्थानक में डॉ. समकित मुनि ने कहा कि जीवन में शांति पाने के लिए पांचवां सूत्र है 'भूल को भूल जाएंÓ। छोटी-छोटी बातें जब बड़ी बन जाती हैं, तब व्यक्ति आपा खो बैठता है। छोटी-छोटी बातों को बड़ा नहीं बनाने का संकल्प लें।
मुनि ने कहा कि मनुष्य बहुत बार आती हुई खुशी को भी अज्ञानता के कारण गम में बदल देता है। आदमी बाहर से तो फल-फूल रहा है, लेकिन भीतर से खोखला हो रहा है। आज व्यक्ति के पास सब कुछ है, लेकिन जो भीतर से खुशी होनी चाहिए, वो नहीं है।
जयवंत मुनि ने गीतिका प्रस्तुत की। भवांत मुनि ने तपस्वियों के प्रति मंगलकामना की। चेन्नई से नवरत्न ग्रुप के 300 सदस्यों का संघ उपस्थित हुआ। चंद्रप्रकाश तालेड़ा को समाज रत्न व एलआर छल्लानी को संघ गौरव उपाधि से नवाजा गया। स्वागत अध्यक्ष कैलाशचंद बोहरा ने किया।
बड़प्पन अपनाएं
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि इस संसार में बड़ा तो हर व्यक्ति बनता है। जन्म के प्रथम समय में बच्चा छोटा रहता है। उसके बाद प्रत्येक समय बढ़ता जाता है और बच्चा बड़ा हो जाता है। मगर बड़प्पन बहुत कम लोगों में आता है। उन्होंने कहा कि उम्र से बड़े हुए व्यक्ति में अपार तुच्छाएं मिलती हैं। मन में तुच्छता, वाणी में तुच्छता, हर कार्य में तुच्छता ही तुच्छता नजर आती है। जो बड़े होते हैं वे तुच्छ नहीं होते और जो तुच्छ होते हैं वे बड़े नहीं होते हैं।
Published on:
11 Aug 2018 05:26 pm
