
आंकड़ों पर संशय : एच1एन1 से चार मौतें !
बेंगलूरु. प्रदेश में एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच चार लोगों के मरने की खबर हैं। मृतकों में एक गर्भवती महिला भी थी। ये मौतें सरकारी अस्पताल में अगस्त और अक्टूबर में हुई हैं। अस्पताल प्रशासन ने मौत का कारण एच1एन1 बताया है। लेकिन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। विभाग को रिपोर्ट मिलने पर कारण की पुष्टि हो सकेगी। विभिन्न अस्पतालों से मिली रिपोट्र्स की जांच हो रही है। रिपोर्ट में मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है।
राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिजीज (आरजीआइसीडी) के आंकड़ों के अनुसार 27 अगस्त को काव्या कामाक्षी (24) की मौत हुई। काव्या 24 सप्ताह की गर्भवती थी। पुतम्मा (60) की मौत एक अक्टूबर को हुई। सात अक्टूबर को गोविंदन (55 ) व गंगारत्नम्मा (37) की मौत हो गई। आरजीआइसीडी के निदेशक डॉ. सी.नागराज ने बताया कि चारों मरीज एच1एन1 से पीडि़त थे।
तमाम उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शहरी जिला स्वास्थ्य अधिकारी को कारण सहित मौतों की रिपोर्ट भी भेजी गई थी। इस बीच, गुरुवार को राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के संयुक्त निदेशक डॉ. एच.सज्जन शेट्टी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने बैठक कर स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक उपाय व इंतजाम करने के निर्देश दिए।
24 घंटे में 25 मरीज
एच1एन1 के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गत 24 घंटे में 25 नए मरीज मिले हैं। प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा निदेशालय में शिक्षा, सूचना व संचार विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश शास्त्री ने बताया कि बुधवार शाम तक मरीजों की संख्या 416 थी। जो गुरुवार शाम तक बढ़कर 441 हो गई है। इनमें से 99 मरीज बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) क्षेत्र से हैं।
जांच शुल्क क्र 2500 से ज्यादा नहीं लें
बेंगलूरु. प्रदेश के निजी अस्पताल व लैब एच1एन1 जांच के लिए 2500 रुपए से ज्यादा नहीं वसूल सकेंगे। प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा निदेशालय की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान के अनुसार अधिकृत निजी लैबों को इस संबंध में शख्त निर्देश दिए गए हैं। अधिकतम जांच शुल्क से ज्यादा वसूलने वाली लैब पर कार्रवाई होगी। सभी जिला और तालुक अस्पतालों में जांच के लिए नमूने लेने के किट उपलब्ध हैं। जांच भी नि:शुल्क है।
सबको दिए गए हैं निर्देश
&सितंबर की शुरुआत से ही से एच1एन1 के मामलों में वृद्धि होने लगी थी। सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार रखने के साथ पर्याप्त जांच उपकरण व जरूरी दवाओं की उपलब्धि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सकों, नर्सों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को एच1एन1 के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों की भी मदद ली जा रही है।
डॉ. एच.सज्जन शेट्टी, संयुक्त निदेशक, राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम
Updated on:
12 Oct 2018, 8:13 PM IST
Published on:
12 Oct 2018, 8:13 PM IST
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