
सयानों की बातों का अनुसरण करें
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर मैसूरु सीआईटीबी परिसर में आयोजित धर्मसभा में श्रुतमुनि ने कहा कि मनुष्य ही मित्रता एवं शत्रुता दोनों ही रखता है। आत्मा एवं मन हमारे मन में कुविचार एवं सुविचार लाता है। इन्हीं विचारों से हमारे राग द्वेष उत्पन्न होता है। उसको जन्म जन्मान्तर तक हमें भुगतना पड़ता है।
मुनि ने उदहारण देते हुए कहा की हमें गीली मिटï्टी की तरह नहीं बल्कि सूखी मिट्टी की तरह रहना चाहिए। गीली मिट्टी को कहीं फेंके तो चिपक जाती है एवं सूखी मिट्टी कहीं चिपकती नहीं है। उन्होंने कहा मारवाड़ी में कहावत है की बड़ां री गालियां और घी की नालियां, अर्थात बड़ों की हम सुनेंगे समझेंगे, जीवन में अनुभव रूपी गाली खाएंंगे तो घी की तरह हमारा जीवन अमृत बन जाएगा। आज अक्षर मुनि की 27वीं तपस्या एवं सुरेश कोठारी, किरणबाई कोठारी के 22वां उपवास, रेखाबाई डागा के 20 उपवास एवं जप तप के उपलक्ष में 200 तपस्याएं गतिमान हैं। सभी तपस्याएं 7 अक्टूबर तक पूर्ण होंगी। यह जानकारी संघ के सहमंत्री भैरूलाल कोठारी ने दी।
वीतराग और भगवान पर विश्वास रखें
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ, मैसूरु के तत्वावधान में डॉ. समकित मुनि ने कहा कि हमें वीतराग और भगवान पर विश्वास रखना चाहिए। अंध विश्वास से दूर रहना चाहिए। दुनिया में बे-वकूफ बनाने वाले बहुत हैं। थोड़ी सी सहानुभूति बताई, थोड़ा चमत्कार दिखाया, थोड़ा लालच दिया तो लोग बहकावे में आ जाते हैं और बहुत कुछ खो बैठते हैं।
बस हमें देव अरिहंत और दयामय धर्म पर श्रद्धा रखनी चाहिए और इन प्रपंचों से हमेशा दूर रहना चाहिए। क्योंकि वीतराग अरिहंत देव से बढ़कर कोई देव नहीं हैं। भवांत मुनि एवं जयवंत मुनि ने तपस्वियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर राजेश कुमार सांखला, मदनलाल कोठारी एवं प्रकाशचंद कोठारी ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। राजेंद्र भंसाली एवं प्रकाशचंद सिंघवी ने लाभार्थियों का अभिनन्द किया।
Updated on:
29 Sep 2018, 8:08 PM IST
Published on:
29 Sep 2018, 8:08 PM IST
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