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हिंदी ने देश में ही नहीं विदेश में भी छाप छोड़ी

ए. राजगोपाल ने कहा कि निगम में राजभाषा कार्यान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 30 Sep 2018, 5:52 PM IST

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हिंदी ने देश में ही नहीं विदेश में भी छाप छोड़ी

बेंगलूरु. भारतीय खाद्य निगम, क्षेत्रीय कार्यालय में हिंदी पखवाड़े का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि इसरो के पूर्व संयुक्त निदेशक अशोक कुमार बिल्लूरे के साथ महाप्रबंधक कर्नाटक ए.राजगोपाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि आज के दौर में हिंदी देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी छाप छोड़ रही है।

ए. राजगोपाल ने कहा कि निगम में राजभाषा कार्यान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। संचालन कुमारी आकांक्षा सिंह, रामकेशरी एवं जितेन्द्रकुमार ने किया। आभार वीरेन्द्र कुमार ने व्यक्त किया। संजना विश्वास ने प्रार्थना गीत पेश किया। बीरेंद्रकुमार ने कार्यकारी निदेशक (दक्षिण), चेन्नई का हिंदी दिवस संदेश पढ़कर सुनाया। गीत गायन, हस्तलेखन, आशुभाषण, निबंध, प्रशासनिक शब्दावली, प्रश्नोत्तरी एवं अंत्याक्षरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विजेताओं को हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह पर प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्रदान किया गया।


हिंदी अपनी भाषा है इससे द्वेष नहीं करना चाहिए
बेंगलूरु. कर्मचारी राज्य बीमा निगम पीनिया में आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ ईश-वंदना से हुआ। राजभाषा प्रभारी उपनिदेशक पी.एन. बोईपी ने मुख्य अतिथि केआइओसीएल के सेवानिवृत्त सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा) एन. रंगनाथाचार का स्वागत किया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. योगानंदन, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश, रॉबर्ट एल. गुइटे, उप निदेशक (प्रशासन) तथा उप निदेशक (राजभाषा प्रभारी) पी.एन. बोईपी ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि ने विभिन्न हिन्दी प्रतियोगिताओं में विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि हिंदी अपनी भाषा है। किसी भी भाषा से द्वेष नहीं होना चाहिए।

हिंदी में कार्य करने के लिए सरकार ने कितनी प्रोत्साहन योजनाएं चला रखी हैं। कार्यशाला के द्वारा आप हिंदी में कार्य करना सीख सकते हैं। आसान और सरल हिंदी का प्रयोग करके भी आप कार्य कर सकते हैं। डॉ. योगानंदन कहा कि हिंदी में कार्य करना हमारा संवैधानिक दायित्व है। सरकार द्वारा दिए गए लक्ष्य को हमें पूरा करना चाहिए। हिन्दी सरल एवं सुगम भाषा है। हम लोगों को स्वेच्छा से हिंदी में कार्य करना चाहिए न कि किसी प्रोत्साहन की आशा रखनी चाहिए। हमें अपनी राजभाषा पर गर्व होना चाहिए और इसका सम्मान करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन माधवी प्रसाद ने किया ने किया। गृह मंत्री के संदेश का वाचन प्रदीप कुमार एस. ने तथा महानिदेशक के संदेश का वाचन श्रद्धा कड्डी ने किया। राहुल कुमार ने आभार प्रकट किया।

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