
कोड़वालैंड की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन
बेंगलूरु. कोड़वा संस्कृति तथा परंपरा की रक्षा के लिए स्वायत्त कोड़वा लैंड के गठन की मांग को लेकर गुरुवार को टाउन हॉल के सामने कोड़वा नेशनल काउंसिल के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किए गए।
काउंसिल के नेता एन. यू. नाचप्पागौड़ा ने कहा कि 1 नवम्बर वर्ष 1956 तक कोडुगू सी श्रेणी में शामिल एक स्वतंत्र राज्य था। लेकिन राज्य पुनर्गठन कानून के तहत कोडुगू राज्य को तत्कालीन मैसूर राज्य में शामिल किया गया। इस दौरान कोडुगू संस्कृति तथा परंपरा की रक्षा के लिए कई वादे किए गए थे लेकिन अभी तक इनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है। जिसके कारण कोडुगू के निवासी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इसलिए यहां के निवासी अपनी संस्कृति तथा परंपरा की रक्षा के लिए स्वायत्त राज्य की मांग के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले यहां के मूल निवासियों की भूमि खरीदने का अधिकार किसी को नहीं था लेकिन अब लोग धन-बल के आधार पर कोड़वा समुदाय के लोगों की जमीन खरीद कर उन्हें भूमिहीन कर रहे हैं। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि आने वाले दिनों में कोडुगू जिले से कोड़वा समुदाय का अस्तित्व ही मिट जाएगा। इस समुदाय की रक्षा के लिए स्वायत्त कोड़वा लैंड का निर्माण अब अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल वजूभाई वाळा, सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी तथा मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी को ज्ञापन सौंपा गया है।
जल शुद्धिकरण यंत्र का उद्घाटन
मण्ड्या. केआरपेट तहसील के मद्दूर गांव में गुरुवार को विधायक के नारायण गौड़ा ने जल शुद्धिकरण यंत्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर तहसीलदार महेश चंद्र, शिवमूर्ति, जानकीराम, मंजुनाथ, पुट्टम्मा सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
जीवन बदल देते हैं प्रवचन
बेंगलूरु. नाकोड़ा पाश्र्वनाथ मंदिर राजाजीनगर में संत अभिनंदन चंद्र सागर ने कहा कि प्रवचन सुनने की तमन्ना मनुष्य के जीवन को बदल देती है। जिनवाणी के माध्यम से हम हमारे निज आत्मा को पहचान सकें वह रोल है जिनवाणी। प्रवचन ही ऐसा माध्यम है कि जिसके द्वारा हम आत्मा की समृद्धि के लिए आगे बढ़ सकते हैं।
Published on:
10 Aug 2018 06:11 pm
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