
कछुआ चाल से हो रही बड़े नालों की मरम्मत
बेंगलूरु. शहर में थोड़ी सी बारिश होने के पश्चात कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा होते हैं। कई बार ऐसे नालों की वजह से जानें भी गईं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वर्ष 2016 में शहर के सभी राजा कालुवे (बड़े नाले) की मरम्मत कर इन नालों में जमा हुई गाद हटाने की योजना बनाई गई थी। जिसके तहत बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) की व्याप्ति में शामिल 842 किलोमीटर लंबे बड़े नालों की मरम्मत के लिए 800 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। यह कार्य मंथर गति से चलने के कारण गत दो वर्षों में केवल 60 फीसदी कार्य पुरा हुआ है। जबकि निर्धारित समय सीमा के तहत इस कार्य को वर्ष 2016 के अंत तक पूरा किया जाना था।
इससे पहले वर्ष 2006 -07 से लेकर वर्ष 2015-16 तक 1,36 7 करोड़ रुपए खर्च कर 177 किलोमीटर नालों के लिए सुरक्षा दीवार तथा गाद हटाने का कार्य किया गया था। उसके पश्चात वर्ष 2016 -17 से लेकर अभी तक 531.27 करोड़ रुपए खर्च कर 119.33 किलोमीटर लंबे नालों की मरम्मत हुई है। वर्ष 2016-17 में नालों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने 800 करोड़ रुपए का अनुदान जारी किया।
इस राशि के अलावा अन्य योजनाओं के अनुदान की मदद से 213 किलोमीटर बड़े नालों की मरम्मत पर 1062.54 करोड़ की राशि खर्च की गई है। लेकिन अभी भी 35 फीसदी कार्य बाकी है। बीबीएमपी के प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक 296 किलोमीटर लंबे बडे नालों के लिए सुरक्षा दीवार का निर्माण, गाद हटाना, मरम्मत तथा अन्य कार्यों के लिए 3 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता है।
पार्षद पद्मनाभ रेड्डी के अनुसार नालों की मरम्मत का कार्य मंथर गति से चलने का प्रमुख कारण यह है कि करोड़ों रुपए की इस योजना का ठेका केवल 6 पैकेज के तहत दिया गया है। साथ में ठेकेदार तथा बीबीएमपी के अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह कार्य मंद गति से चल रहा है। ऐसे में शहर में अगर भारी बारिश होती है तो ऐसे में कई इलाखों में बाढ़ जैसे हालात पैदा होना सुनिश्चित है।
Published on:
10 Aug 2018 08:54 pm
