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जीवन में सहनशीलता जरूरी

मुनि सुव्रतकुमार ने कहा कि हमारे जीवन में सहनशीलता, समता, क्षमा का विकास होना चाहिए
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 29 Sep 2018, 6:48 PM IST

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जीवन में सहनशीलता जरूरी

बेंगलूरु. मुनि सुव्रतकुमार एंव मुनि मंगल प्रकाश के सान्निध्य में अभतेमम द्वारा निर्देशित सशक्तिकरण के अंतिम पड़ाव 'ट्रांसफर योर सेल्फ विद टर्निंग प्वाइंट' की कार्यशाला तेरापंथ महिला मंडल केजीएफ द्वारा स्थानीय तेरापंथ सभा भवन में आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल कि बहनों द्वारा मंगला चरण से हुई। मुनि सुव्रतकुमार ने कहा कि हमारे जीवन में सहनशीलता, समता, क्षमा का विकास होना चाहिए। हर व्यक्ति में सामंजस्य बैठाने का प्रयत्न करना चाहिए।

हर एक बहन को आगे बढऩे का मौका मिलना चाहिए और सबके मन में प्रमोद भावना रहनी चाहिए। मुनि मंगल प्रकाश ने कहा टॉलरेंट, ट्रांसपेरेंट, थॉटफुल होना जीवन की सफलता के लिए जरूरी है। महिला मंडल अध्यक्ष कान्ता सेठिया ने शब्द चित्र के माध्यम से एम्पॉवरमेंट एक्सप्रेस के पूरे सफर का शॉर्ट रिकेप दिखाया, जिसमें सभी युवतियों ने बड़े उत्साह से भाग लिया व बहुत ही सुंदर प्रस्तुती दी। महिला मंडल के मंत्री भंवरीबाई हिंगड़ ने आभार व्यक्त किया।


भक्ति में खो जाओ
चामराजनगर. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गुंडलपेट की ओर से आयोजित धर्मसभा में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि 4 तरह का नशा होता है। पहला नशा मदिरा का, जिसमें दस मिनट, 20 व 30 मिनट नशे वाले को कुछ भी पूछो सही जवाब नहीं मिलेगा। दूसरा नशा वासना का। मदिरा का नशा 8 से 10 घंटे में उतर जाता है। वासना का नशा 5,10,20 साल बाद खत्म होता है। तीसरा नशा सम्पत्ति का होता है जो दुर्योधन को था। पहला शरीर को खत्म करता है। दूसरा, तीसरा परिवार और जीवन को खत्म कर सकता है। चौथा नशा भक्ति का है। वह नशा गौतम को था, चंदनबाला को था। भक्ति का नशा सद््गति प्रदान करता है। इन्सान अगर भक्ति रूपी नशे में डूब जाता है तो वह अपनी मंदिर को पा ही लेता है। मंच संचालन आनन्द गन्ना ने किया।


माता-पिता की छत्रछाया में है सुरक्षा
बसवनगुड़ी स्थित विमलनाथ मंदिर में साध्वी प्रियरंजना ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मर्यादा और बड़ों की छात्रछाया नहीं हो तो जीवन सुरक्षित नहीं है। इससे परिवार भी सुरक्षित नहीं है। ऐसी मर्यादा और बड़ों की छत्रछाया बिना जीवन के सत्व को खत्म कर देती है। परिवार की शील सुरक्षा सदाचार की पंूजी को जलाकर खत्म कर देती है। साध्वी ने कहा कि अच्छा आलम्बन जेसे एक ताकत है, वैसे गलत आलम्बन भी एक ताकत है। परन्तु इन दोनों में फर्क है।

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