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Banswara : परिवार के इकलौते वारिस परख जैन ने छोड़ा चिकित्सा करियर, तोड़ी सगाई, ग्रहण की दीक्षा

Banswara : बांसवाड़ा में परिवार के इकलौते वारिस डॉक्टर परख जैन संन्यासी बने। डॉक्टर परख जैन के दृढ़ संकल्प और मोक्षमार्ग की तीव्र इच्छा के आगे सभी परिजन नतमस्तक हुए।

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Banswara Family only heir Parikh Jain gave up his medical career broke off his engagement and took vows of celibacy

बांसवाड़ा. ब्रह्मचारी दीक्षा ग्रहण करते परख जैन। फोटो पत्रिका

Banswara : बांसवाड़ा के खांदू कॉलोनी निवासी परख जैन (दाजू) ने चिकित्सा सेवा के सफल कॅरियर को त्यागकर आत्म कल्याण की राह चुनी। उन्होंने 29 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के अशोकनगर में श्रमण मुनिपुंगव 108 सुधासागर के चरणों में विधिपूर्वक ब्रह्मचारी दीक्षा ग्रहण की और संघ में प्रवेश किया।

परख परिवार का था इकलौता वारिस

अश्रुजल से अभिभूत माता-पिता वीणा देवी एवं अजय जैन, दादी विमला देवी और दादा सागरमल जैन ने बताया कि परख परिवार का इकलौता वारिस था, किंतु उसके दृढ़ संकल्प और मोक्षमार्ग की तीव्र इच्छा के आगे वे नतमस्तक हो गए।

चार वर्षों से चिकित्सा क्षेत्र में कर रहे थे सेवा

समाज के सेठ अमृतलाल जैन एवं अक्षय डांगरा ने बताया कि 18 सितंबर 1995 को जन्मे परख ने बांसवाड़ा से ही अपनी स्कूली व कॉलेज शिक्षा पूरी की। वे पिछले चार वर्षों से चिकित्सा क्षेत्र में सेवा दे रहे थे। बचपन से ही संत समागम के संस्कारों ने उनमें वैराग्य का बीज बो दिया था, जो अब फलित हुआ।

परख जैन की हो चुकी थी सगाई

परख जैन की सगाई भी पूर्व में हो चुकी थी, किंतु अपने आध्यात्मिक संकल्प के प्रति अटूट निष्ठा के कारण उन्होंने गृहस्थ जीवन का मोह त्यागकर ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया।

जैन समाज ने भावपूर्ण अनुमोदना व्यक्त की

समाज के वरिष्ठ श्रावक श्रेष्ठी अशोक घुघरावत ने बताया कि सुधासागर महाराज ने उन्हें संघ में प्रवेश से पूर्व सभी सांसारिक वस्तुओं का त्याग करवाया और संयम जीवन की विधियों का प्रशिक्षण दिया। दीक्षा के इस अवसर पर जैन समाज ने भावपूर्ण अनुमोदना व्यक्त की।