इस दिन संध्या के समय भगवान का मत्स्यावतार हुआ था। इस दिन गंगा स्नान के बाद दीप-दान आदि का फल दस यंज्ञों के समान प्राप्त होता है । ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा, आदित्य के अनुसार यह महापुनीत पर्व हैै। इसलिए भी इसका विशेष महत्व है। इस दिन चँद्रोदय पर शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसुइया और क्षमा इन छः कृतिकाओं का पूजन अवश्य करना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि में व्रत करके बैल दान करने से शिव पद प्राप्त होता है। गाय, घी, आदि का दान करने से सम्पत्ति बढ़ती है। इस दिन भेड़ दान करने से ग्रहयोग के कष्टों का नाश होता है। इस दिन कन्या दान से ’’संतान व्रत’’ पूर्ण होता है।