
इस बार करवा चौथ में बन रहेे कई विशेष योग, व्रत में जरूर करें ये काम
बरेली। करवा चौथ व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को किया जाता है। इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अटल सुहाग, पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं मंगल कामनाओं के लिए व्रत करती है। 27 अक्टूबर शनिवार को चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि सायं 06ः38 बजे के बाद आरम्भ होगी। बाला जी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि इस करवा चौथ (Karwa Chauth) की विशेष बात यह है कि चन्द्रमा वृष राशि एवं रोहिणी नक्षत्र में उदय होगा। ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा होने के कारण एवं चन्द्रमा स्वंय अपनी उच्च राशि वृष में उदय होने के कारण हर्षोल्लास देगा। इस दिन शुक्र, अस्त रहेगा तथा शुक्र को वृद्धत्व-वाल्यत्व दोष रहेगा परन्तु शुक्र स्वंय अपनी तुला राशि में रहने के कारण दोष रहित रहेगा।
इस बार बन रहे विशेष योग
इस दिन प्रातः 08ः20 बजे से आगामी सूर्योदय तक सर्वाथ सिद्ध योग रहेगा।
सांय 06ः38 बजे से आगामी सूर्योदय तक सिद्ध योग रहेगा।
प्रातः 08ः20 बजे से आगामी सूर्योदय तक अमृत सिद्ध योग रहेगा।
ध्वज योग पूरे दिन रहेगा।
चन्द्र - रोहिणी युति सांय 06ः34 बजे से।
पूजन विधि
इस दिन व्रती स्त्रियों को प्रातःकाल स्नानादि के बाद पति, पुत्र-पौत्र तथा सुख-सौभाग्य की इच्छा का संकल्प लेकर यह व्रत करना चाहिए। इस व्रत में शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चन्द्रमा का पूजन करके अध्र्य देकर ही जल, भोजन ग्रहण करना करें। चन्द्रोदय के कुछ पूर्व एक पटले पर कपड़ा बिछाकर उस पर मिट्टी से शिवजी, पार्वती जी, कार्तिकेय जी और चन्द्रमा की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाकर अथवा करवाचैथ के छपे चित्र लगाकर कर पटले के पास पानी से भरा लोटा और करवा रख कर करवाचैथ की कहानी सुने। कहानी सुनने से पूर्व करवे पर रोली से एक सतिया बना कर उस पर रोली से 13 बिन्दियां लगाए साथ ही हाथ में गेहूं के 13 दाने लेकर कथा सुने। चन्द्रमा निकल आने पर उसे अर्ध्य देकर स्त्रियां भोजन करें।
चन्द्र दर्शन के समय क्या करें
चन्द्रमा निकलने से पूर्व पूजा स्थल को रंगोली से सजा लें और एक करवा टोटीदार उरई की पांच या सात सींक डालकर रखें। रात्रि में चन्द्रमा निकलने पर चन्द्र दर्शन कर अर्ध्य दिया जाता है। चन्द्रमा के चित्र पर निरन्तर धार छोड़कर सुहाग और समृद्धि की कामना करें। पति व बुजुर्गाें के चरण स्पर्श कर बने हुये पकवान प्रसाद में चढ़ाये। व्रत पूर्ण होने पर प्रसाद ग्रहण करें।अन्य व्रतों के साथ इस करवाचैथ का उजमन किया जाता है। इसमें 13 सुहागिनों को भोजन कराने के बाद उनके माथे पर बिन्दी लगाकर और सुहाग की वस्तुऐं एवं दक्षिणा देकर विदा कर दिया जाता है।
Updated on:
26 Oct 2018 03:38 pm
Published on:
26 Oct 2018 09:31 am
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