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पर्यटन को बढ़ावा देने वाली झील हो गई घोटाले का शिकार

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ लीलौर झील में हुए घपले की जांच शुरू हो गई।
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बरेली

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Amit Sharma

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Updated: 27 Sep 2017, 5:55 PM IST

Scam

बरेली। आंवला क्षेत्र की जिस लीलौर झील का पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुंदरीकरण होना था अखिलेश सरकार में वो झील घोटाले का शिकार हो गयी और रामनगर इलाके को पर्यटन हब में विकसित करने का सरकार का सपना पूरा नहीं हो पाया।सरकार बदलने पर झील के सुंदरीकरण के नाम पर सरकारी रुपयों की बंदरबांट करने वाले ठेकेदारों और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।


रामनगर क्षेत्र में स्थित महाभारतकालीन लीलौर झील को पर्यटन स्थल बनाने के लिए सपा सरकार में योजना बनी थी। तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश के प्रयास से 13 करोड़ रूपए से इस झील का सुंदरीकरण होना था। झील के सुंदरीकरण के लिए सिंचाई विभाग, पीडब्लूडी, वन विभाग और पर्यटन विभाग को करना था। सिंचाई विभाग को काम करने के लिए साढ़े आठ करोड़ का बजट भी मिला था। मिट्टी की खुदाई के नाम पर सपा सरकार के चेहते ठेकेदारों ने अफसरों के साथ मिलकर करोड़ों रूपए ठिकाने लगा दिए लेकिन झील का सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया।


कई अफसरों पर हुई कार्रवाई

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ लीलौर झील में हुए घपले की जांच शुरू हो गई। सिंचाई मंत्री धर्मपाल के चुनाव क्षेत्र में होने के कारण सिंचाई मंत्री ने झील में हुए घपले की जांच में रुचि दिखाई और प्रमुख सचिव द्वारा पूरे मामले की जांच की गई तो तमाम अफसर इनमें दोषी पाए गए जिन्हें सस्पेंड किया गया।


इसी क्षेत्र में अन्य पर्यटन स्थल

आंवला विधानसभा में ही अहिच्छत्र का किला भी मौजूद है। अहिच्छत्र पांचाल देश की राजधानी रहा है। वहीं पांचाल जिसका जिक्र महाभारत में आता है और पांडवों की पत्नी द्रौपदी यानी पांचाली यहीं की थीं। इससे इस जगह की प्राचीनता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अहिच्छत्र के अवशेष यहां अभी भी हैं। यह जगह बरेली शहर से तकरीबन साठ किलोमीटर दूर है।

इसी से सटा हुआ है रामनगर। रामनगर अपने नाम के अनुसार ही धार्मिक नगरी है। यह स्थान जैन धर्म के ईष्ट भगवान पार्श्वनाथ की तप स्थली रहा है। दक्षिण भारतीय और आधुनिक शैली में बनाए गए श्री अहिच्छत्र पार्श्वनाथ जैन मंदिर के दर्शन के लिए देश-विदेश के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

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