8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लोग फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर, करोड़ों के आरओ प्लांट ताले में कैद, मशीनों को लग रही जंग

राज्य सरकार की ओर से फ्लोराइड प्रभावित अलग-अलग ग्राम पंचायत मुख्यालयों व कस्बों व गांवों में करोड़ों रुपए खर्च कर तकरीबन 8 वर्ष पूर्व पेयजल के लिए स्थापित किए गए आरओ प्लांट पर ताले लगने के कारण इसकी मशीनों को ज़ंग लग रहा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बाड़मेर

•

image

Kirti Verma

•

Updated: 21 Sep 2023, 2:56 PM IST

ro.jpg

बाड़मेर/सिणधरी. राज्य सरकार की ओर से फ्लोराइड प्रभावित अलग-अलग ग्राम पंचायत मुख्यालयों व कस्बों व गांवों में करोड़ों रुपए खर्च कर तकरीबन 8 वर्ष पूर्व पेयजल के लिए स्थापित किए गए आरओ प्लांट पर ताले लगने के कारण इसकी मशीनों को ज़ंग लग रहा है। पत्रिका ने आरओ प्लांट का जायजा लिया तो ये हालात सामने आए।

इस दौरान जायजा लेने पर पता चला कि लूनी नदी किनारे, सड़ा, कोशलू, जूना मीठा खेड़ा, धनवा, धाका व भूका भगतसिंह सहित अधिकतर स्थानों पर स्थापित आरओ प्लांट लंबे समय से ताले में बंद होने से मशीनें अनुपयोगी हो गई हैं।

आमजन फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं। मालूम हुआ कि लोगों में जागरूकता व कंपनी व पीएचईडी के प्रभावी मॉनिटरिंग न होने के कारण आरओ प्लांट न के बराबर उपयोगी साबित हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक एक आरओ प्लांट पर प्रति महीने 5 हजार रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर ऐसा नजर नहीं आ रहा है।

आमजन भी कर रहे नजरअंदाज
लोगों ने कुछ दिन के लिए आरओ प्लांट से पानी लेने में रुचि ली, लेकिन कस्बे व ग्राम पंचायतों से दूर होने के कारण लोग रुचि नहीं ले रहे हैं। अधिकतर आरओ झाड़ियों में कस्बों से दूर हैं।

फ्लोराइडयुक्त पानी से बीमारियों की आशंका
दोनों पंचायत समितियों में लगे अनुपयोगी आरओ प्लांट के बावजूद लोग फ्लोराइडयुक्त पानी पी रहे हैं। इससे युवाओं और बच्चों के एक तरफ से दांत पीले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ बुजुर्ग और युवा जोड़े के दर्द से परेशान हो रहे हैं।

यह भी पढ़ें : क्यों न स्मार्टफोन गारंटी कार्ड देने के आदेश को रद्द कर दिया जाएः हाईकोर्ट

प्रति महीने ऑपरेटर को वेतन, फिर भी बंद
जानकारी के अनुसार गांव ढाणी में लगे आरओ पर कर्मचारी को कंपनी की ओर से प्रति महीने दो हजार रुपए वेतन दिया जा रहा है। जबकि नियमित आरओ नहीं खुलने के कारण धीरे-धीरे कबाड़ हो रहे हैं।

मेरे क्षेत्र में 11 आरओ प्लांट हैं, जहां कहीं भी आरओ प्लांट हैं, वे सुचारू करवाए जाएंगे। लोग आरओ प्लांट से पानी नहीं ले जा रहे हैं।
रमेश वैष्णव, सहायक अभियंता,पीएचईडी गुड़ामालानी।

पुराने आरओ संचालित हो रहे हैं। नए आरओ प्लांट के लिए कई बार पत्र लिखे, कॉल भी किए ,लेकिन कंपनी कोई जवाब नहीं दे रही है। मेरे क्षेत्र में बंद आरओ रिपोर्ट कर तुरंत चालू करवाएंगे।
दीपकसिंह, सहायक अभियंता, पीएचईडी, सिणधरी।

यह भी पढ़ें : Rajasthan : जलीय जीवों का सुपर ट्यूरिस्ट सेंटर बनने की राह पर घड़ियाल अभयारण्य, ये है खासियत