
बालोतरा.राजकीय नाहटा अस्पताल में सूनी गैलरी।
बालोतरा
चिकित्सकों की राज्य व्यापी हड़ताल के तीसरे दिन नगर व क्षेत्र के राजकीय चिकित्सालयों में उपचार की व्यवस्था लडख़ड़ा गई है। चिकित्सालयों में ऐलोपैथिक उपचार नहीं मिलने पर मरीज नहीं पहुंच रहे हंै। इस पर वहां सुबह -शाम सन्नाटा पसरा रहता है। उपचार के लिए मरीजों को दर दर भटकना पड़ रहा है। बुधवार को नगर के राजकीय नाहटा चिकित्सालय में नाममात्र मरीज उपचार के लिए पहुंचे। वहीं दूसरी ओर निजी चिकित्सालयों में मरीजों की भीड़ रही। नाहटा अस्पताल में बुधवार तीसरे दिन भी चिकित्सालय के 15 डॉक्टर काम पर नहीं लौटे। वैैकल्पिक व्यवस्था के लिए नियुक्त दस आयुष व आयुर्वेद चिकित्सकों ने तीसरे दिन भी सेवाएं दी, लेकिन चिकित्सालय में ऐलोपेथिक सेवाएं नहीं मिलने पर नाममात्र ही मरीज यहां पहुंचे। अधिकांश मरीज चिकित्सालय से बैरंग लौटे। 55 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इस पर चिकित्सक व नर्सिंगकर्मी पूरे समय हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। चिकित्सा विभाग ने नगर के नाहटा चिकित्सालय में आयुर्वेद दवाइयां उपलब्ध करवाई। इस पर उपचार के लिए पहुंचे मरीजों ने कुछ राहत महसूस की। वहीं अस्वस्थता को लेकर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी अवकाश पर रहे। इस पर चिकित्सालय का कामकाज नर्सिंग अधीक्षक ने देखा। मरीजों ने शहर के निजी चिकित्सालयों में उपचार करवाया। इस पर निजी चिकित्सालयों में पूरे दिन मरीजों की रेलमपेल रही।
पचपन मरीज आए अस्पताल-तीसरे दिन भी आयुष व आयुर्वेद चिकित्सकों ने सेवाएं दी। 55 मरीज अस्पताल पहुंचे। आयुर्वेद दवाइयां उपलब्ध करवाई गई। - उमाराम पटेल, कार्यवाहक प्रमुख चिकित्सा अधिकारी एवं नर्सिंग अधीक्षक बालोतरा.
सीएमएचओ, पीएमओ भी गायब, प्रशासन को कमान
चिकित्सकों की हड़ताल से अस्पताल खाली हो गए है। जिलेभर में सरकारी अस्पताल में ओपीडी 3239 ही रही है जो आम दिनों में 9 हजार के करीब रहती है। बुधवार को सीएमएचओ और दोनों पीएमओ सहित प्रशासकीय कार्य में लगे चिकित्सक भी अवकाश पर चले गए है। व्यवस्था प्रशासन के हाथ में आ गई है।
राजकीय अस्पताल बाड़मेर में पीएमओ डा. बी एल मंसूरिया सहित 37 चिकित्सक हड़ताल में शामिल और समर्थन में होने से अस्पताल खाली हो गया है। यहां कंपनियों की मदद से लगे तीन चिकित्सक लगे है जो यहां आने वाले मरीजों की जांच कर रहे है । जांच को 711 मरीजों की ओपीडी रही है जबकि अस्प्ताल में 20 मरीज दाखिल है। सामान्यतया यह 2000 और 350 होते है। मरीज कम होने से अस्पताल खाली पड़ा है। यहां दाखिल मरीजों में भी गंभीर कोई नहीं है। प्रसूताएं और बच्चे है। इसके अलावा बर्न और मारपीट के मामलेके मरीज है।
निजी अस्पतालों में भीड़- जहां राजकीय अस्पताल में मरीज नहीं पहुंच रहे है उधर निजी अस्प्तालों में मरीजों की भीड़ उमड़ी हुई है। मरीजों को यहां उपचार मिल रहा है और गंभीर होने पर इनको गुजरात भेजा जा रहा है।
पुलिस ने लिए चिकित्सकों के अते-पते- रेस्मा लागू होने से अब सरकार की ओर से चिकित्सकों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश वार्ता सफल नहीं होने पर आ सकते है। इस लिहाज से पुलिस ने भी चिकित्सकों के अते पते ले लिए है। सरकारी आदेश आते ही इनकी तलाश करनी प्रारंभ कर दी जाएगी। चिकित्सकों ने मोबाइल के स्वीच ऑफ कर दिए है।
Published on:
8 Nov 2017, 11:53 PM IST
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