मां-बाप नहीं लौटा सकते पर फिक्र मत करना...: आठों भाई-बहन के लिए पढ़ाई, शादी, मकान, अनाज और जरूरत के हर सामान की मदद समाज ने की है। जो आया वे बेटियों के सिर पर हाथ रखकर यही कहता गया-बेटा-मां-बाप नहीं लौटा सकते...,बाकी फिक्र मत करना। अनाथ हुई बेटियों की आंखों में मां-बाप खोने का दर्द तो है, लेकिन समाज की पहल से दुख की घड़ी में उन्हें तसल्ली मिली है।