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बातों-बातों में बीत गए बीस साल, गल्र्स कॉलेज का वही हाल

- उच्च शिक्षा बगैर छोडऩी पड़ती है पढ़ाई
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बाड़मेर

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Dileep Kumar Dave

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Updated: 27 Nov 2017, 6:09 PM IST

बालिका उच्च शिक्षा की जहां से शुरूआत की गई थी, आज भी वहीं स्थिति है।

बालिका उच्च शिक्षा की जहां से शुरूआत की गई थी, आज भी वहीं स्थिति है।


बालोतरा.

नगर में बालिका उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर दो दशक पूर्व महाविद्यालय खोला गया था। इस पर शहर व क्षेत्र के अभिभावकों ने बालिका उच्च शिक्षा को लेकर सुनहरे सपने संजोए, लेकिन कमजोर पैरवी व सरकारी उपेक्षा के चलते बालिका उच्च शिक्षा की जहां से शुरूआत की गई थी, आज भी वहीं स्थिति है। बीस बर्षों में बालिका महाविद्यालय को क्रमोन्नत नहीं करने पर स्नातकोत्तर को लेकर बालिकाओं को हर वर्ष बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है। सुविधा अभाव में कई बालिकाएं बीच में पढ़ाई छोडऩे को मजबूर है।
शहर व क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर प्रदेश सरकार ने वर्ष1997 में बालोतरा में कन्या महाविद्यालय की शुरूआत की थी। भवन अभाव में इसे पुराने राजकीय उच्च महाविद्यालय भवन में प्रारंभ किया गया। इस पर शहर व क्षेत्र के लोगों ने बालिका उच्च शिक्षा को बड़े ख्वाब देखे, लेकिन इसके बाद सरकार व जनप्रतिनिधियों के रुचि नहीं लेने पर उच्च शिक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया। इस अवधि में बालिका स्नातक महाविद्यालय के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में क्रमोन्नत नहीं होने पर उच्च शिक्षा को लेकर छात्राओं को हर वर्ष परेशानी उठानी पड़ती है।

शहर की अधिकांश बालिकाएं मात्र स्नातक पास- शहर में स्नातकोत्तर स्तर का बालिका महाविद्यालय नहीं होने से शहर की अधिकांश बालिकाएं स्नातक पास ही है। गौरतलब है कि प्रतिवर्ष
कला, विज्ञान व वाणिज्य संकाय प्रथम वर्ष में 390 छात्राओं को प्रवेश दिया जाता है। वहीं अंतिम वर्षमें इतनी ही छात्राएं उत्तीर्ण होती है। महाविद्यालय में स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा के अभाव में अधिकांश बालिकाएं स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रही है। शहर से स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूर होने व असुरक्षा की भावना को लेकर अधिकांश छात्राएं स्वयंपाठी के रूप में पढ़ाई करने को मजबूर है। जानकारी अनुसार प्रतिवर्ष करीब 2 हजार छात्राएं स्वयंपाठी अध्ययन करती है।

सरकार के दावे खोखले-
बालिका उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर सरकार के दावे खोखले हंै। स्थापना के बीस वर्ष बाद भी महाविद्यालय को क्रमोन्नत नहीं करना छात्राओं के साथ अन्याय है।

सुमित्रा राजपुरोहित महासचिव छात्रसंघ
स्नातक में प्रवेश संख्या सीमित-

बालिका स्नातक महाविद्यालय में प्रवेश की संख्या सीमित है। इस पर अधिकांश बालिकाओं को प्रवेश नहीं मिलता है। वहीं, इसे क्रमोन्नत नहीं करने पर प्रवेशित छात्राओं को भी स्वयंपाठी के रूप में पढ़ाई करनी पड़ती है।
कौशल्या पालीवाल

क्रमोन्नत करें महाविद्यालय- शहर व क्षेत्र की बालिकाओं को उच्च शिक्षा का अवसर उपलब्ध करवाने के लिए सरकार महाविद्यालय को क्रमोन्नत करें। इससे की बालिकाएं उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित नहीं रहें।

बबीता माली