
सरकारी दावा और जमीनी हकीकत अलग-अलग (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Road Accident: सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों के लिए केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई कैशलेस उपचार योजना को प्रदेश में लागू हुए पांच माह से अधिक बीत चुके हैं लेकिन जिले में अब तक एक भी मरीज को इसका लाभ नहीं मिला है। सरकारी दावों के विपरीत सड़क हादसों में घायल लोग आज भी अपने स्वयं के खर्च या आयुष्मान कार्ड के सहारे उपचार करा रहे हैं।
इस योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित को सात दिन तक डेढ़ लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाना है। एक परिवार के तीन सदस्य इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। मई 2025 में लागू हुई यह योजना राज्य में भी प्रभावी घोषित की गई थी। लेकिन पांच माह बाद भी जिले में एक भी क्लेम दर्ज नहीं किया गया। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि हर माह दर्जनों सड़क हादसे होते हैं। मगर कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम का कोई लाभार्थी नहीं है।
जिले से गुजरने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 30 (कवर्धा-बेमेतरा-सिमगा) और एनएच 130 (रायपुर-सिमगा-नांदघाट-बिलासपुर) पर सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सर्वाधिक है। इन मार्गों पर ट्रॉमा सेंटर न होने से गंभीर रूप से घायल मरीजों को रायपुर या दुर्ग तक रेफर किया जाता है। बेमेतरा-बेरला-उरला मार्ग पर भी हादसों की संख्या बढ़ रही है लेकिन बेरला व नांदघाट में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर अब तक संचालित नहीं हो पाए हैं।
सिर्फ बेमेतरा सिटी कोतवाली क्षेत्र में ही पिछले 15 दिनों में तीन लोगों की मौत और 14 लोग घायल हुए हैं। 22 अक्टूबर को ग्राम सैगोना में पैदल जा रहे बुजुर्ग की मौत हुई। वहीं उसी दिन जेवरा में टैंकर और स्कॉर्पियो की टक्कर में एक व्यक्ति की जान चली गई। 26 अक्टूबर को कंतेली मार्ग पर हुई दुर्घटना में एक की मौत और छह लोग घायल हुए। इन सभी मामलों में किसी भी घायल को डेढ़ लाख रुपए की कैशलेस सुविधा नहीं मिल सकी।
Chhattisgarh Road Accident: अस्पताल प्रबंधन और अधिकारियों से बातचीत में सामने आया कियोजना औपचारिक रूप से लागू तो हो चुकी है लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है, मगर पोर्टल पर आईडी जनरेट करने से लेकर क्लेम अप्रूवल तक की प्रणाली अस्पष्ट है। सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में भी इस योजना पर चर्चा तक नहीं होती, जिससे यह योजना फिलहाल कागजों और फाइलों में सिमटकर रह गई है।
सरकारी दावे और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल पीड़ितों के लिए बनाई गई यह महत्वाकांक्षी कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम अब तक किसी जरूरतमंद तक नहीं पहुंच पाई है। ट्रॉमा सेंटर के अभाव, प्रशासनिक उदासीनता और तकनीकी प्रक्रिया की अस्पष्टता ने इस योजना को कागजों में सीमित राहत बना दिया है।
Updated on:
03 Nov 2025 03:39 pm
Published on:
03 Nov 2025 03:39 pm
