29 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Migratory Birds: साइबेरिया से छत्तीसगढ़ पहुंचा काला पिद्दा, इस पक्षी विहार में प्रवासी पक्षियों की बढ़ी रौनक

Gidhwa Reservoir: छत्तीसगढ़ के गिधवा-परसदा पक्षी विहार में सर्दी शुरू होते ही प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट बढ़ गई है। मैलार्ड बत्तख के बाद साइबेरियन स्टोनचैट दिखाई दिया।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बेमेतरा

•

image

Laxmi Vishwakarma

•

Updated: 29 Oct 2026, 12:33 PM IST

Migratory Birds

गिधवा-परसदा में विदेशी मेहमान (Photo Source- Patrika)

Migratory Birds: सर्दी की शुरुआत के साथ ही नवागढ़ ब्लॉक के प्रसिद्ध गिधवा-परसदा पक्षी विहार में विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन तेज हो गया है। गिधवा जलाशय में मैलार्ड बत्तख का जोड़ा दिखाई देने के बाद अब साइबेरिया से आने वाली छोटी चिडिय़ा साइबेरियन स्टोनचैट (काला पिद्दा) भी नजर आई है। पक्षी मित्र जयंत जायसवाल के अनुसार, लगभग सभी प्रवासी पक्षी विहार में पहुंच चुके हैं। इससे क्षेत्र में पक्षी प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स का उत्साह बढ़ गया है।

Bird Watching: उत्तर अमेरिका, यूरोप से आते हैं ठंड बिताने

मैलार्ड बत्तख उत्तर अमेरिका, यूरोप और साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों से सर्दियां बिताने भारत आती है। हरे चमकदार सिर, पीली चोंच व भूरे सीने के कारण आकर्षण का केंद्र रहती है। वहीं, साइबेरियन स्टोनचैट अपनी विशिष्ट बनावट और व्यवहार के लिए पहचानी जाती है।

काला सिर और नारंगी-भूरी छाती पहचान

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, तस्वीर में दिखाई देने वाली साइबेरियन स्टोनचैट नर है। इसके काले सिर, गर्दन पर सफेद कॉलर और गहरी नारंगी-भूरी छाती से इसकी पहचान की जाती है। यह साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर सर्दियों में भारत आती है। इसकी आवाज पत्थरों के टकराने जैसी सुनाई देती है। स्थानीय बर्ड गाइडों के मुताबिक, साइबेरियन स्टोनचैट अक्सर तार, डालियों और झाडिय़ों की ऊंची जगहों पर बैठती है। वहां से उडक़र कीड़े पकड़ती है और फिर उसी स्थान पर लौट आती है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खाकर प्राकृतिक रूप से उनके नियंत्रण में मदद करती है।

अभयारण्य घोषित करने मांग

गिधवा जलाशय में पर्याप्त जलभराव और शांत वातावरण प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है। यहां दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाती है। स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों की मांग है कि गिधवा-परसदा को पक्षी अभयारण्य घोषित कर संरक्षण एवं पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए। इससे क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।