
lok sabha seats in mp: मध्यप्रदेश की बैतूल लोकसभा सीट पर एक बार फिर भाजपा ने कब्जा जमा लिया। यहां भाजपा के दुर्गादास उइके एक बार फिर सांसद चुने गए। यहां तीसरे चरण के दौरान 7 मई को वोटिंग हुई थी। बैतूल में कुल 67.97 फीसदी प्रतिशत मतदान हुआ था। बैतूल, हरदा और खंडवा के कुछ हिस्से को मिलाकर बनाई गई बैतूल लोकसभा सीट पर शेड्यूल कास्ट वोटर का दबदबा रहता है। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां 6 पर भाजपा का कब्जा है और दो पर कांग्रेस काबिज है। इनमें मुलताई, घोड़ाडोंगरी, हरदा, अमला, भैंसदेही, हरसूद, बैतूल और टिमरनी सीटें हैं।
दुर्गादास यानी डीडी उइके ने कांग्रेस के रामू टेकाम को 3,79761 वोटों से शिकस्त दी। जीत के बाद डीडी ने 5 वायदे भी किए हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज का निर्माण कराया जाएगा। शासकीय इंजीनियरिंग कालेज खोलने के प्रयास करेंगे। ताकि बच्चों को बाहर न जाना पड़े। कृषि महाविद्यालय खुलवाया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा की बेहतर व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी को परेशानी न हो।। युवाओं को रोजगार के लिए कार्य करेंगे।
एक नजर
भाजपा- दुर्गादास उइके 854298 वोट मिले। वोट शेयर 62.5 फीसदी रहा।
कांग्रेस- राम टेकाम को 474575 वोट मिले। वोट शेयर 35.40 फीसदी रहा।
बैतूल लोकसभा सीट (betul lok sabha seat) इसलिए भी चर्चा है क्योंकि देश की अहम नदियों में शामिल ताप्ती नदी का उद्गम स्थल बैतूल जिले के मुलताई में है। इसी क्षेत्र में जैन तीर्थ मुक्तागिरी है, जो विश्व प्रसिद्ध है। माना जाता है कि इस तीर्थ में आज भी केसर और चंदन की बारिश होती है। बैतूल क्षेत्र के बारे में कहा जाता है कि खेडला दुर्ग, भंवरगढ़, सावलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ के किले हैं, जो गोंड राज्य का इतिहास बताते हैं। इसी क्षेत्र में सारनी है, जहां सतपुड़ा थर्म पावर स्टेशन भी है। जहां से मध्यप्रदेश में बिजली सप्लाई होती है।
बैतूल जिले के बारे में कहते हैं कि मध्यप्रदेश के दक्षिण में यह एक धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाला क्षेत्र है। यहां काफी समय तक मराठाओं और अंग्रेजों ने राज किया था। नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में 2011 की जनगणना के अनुसार 24 लाख 59 हजार 626 लोग रहते हैं। जबकि इसकी 81.68 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और 18.32 आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है।
इस सीट का गठन 1951 में हुआ था। सबसे पहले यहां कांग्रेस जीती थी। 1967 और 1971 के चुनाव में भी इस सीट पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। 1977 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के साथ निकल गई और भारतीय लोकदल ने पहली बार यहां खाता खोला था। हालांकि 1980 में कांग्रेस ने दोबारा वापसी की और गुफरान आजम यहां से सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1984 में भी कांग्रेस चुनाव जीती थी। भाजपा पहली बार 1989 में जीत दर्ज कर पाई थी। आरिफ बेग ने कांग्रेस के असलम शेरखान को हराकर यहां भाजपा को पहली जीत दिलाई थी।
2019 के चुनाव की बात करें तो भाजपा के दुर्गादास उइके को 8 लाख 11 हजार 248 वोट मिले थे। वे चुनाव जीत गए थे। कांग्रेस के रामू टेकाम को 4 लाख 51 हजार 007 वोट मिले थे। जबकि तीसरे नंबर पर बसपा के अशोक भलावी रहे थे उन्हें 23 हजार 573 वोट मिले थे।
2014 के चुनाव की बात करें तो भाजपा ने यहां से ज्योति धुर्वे को मैदान में उतारा था। कांग्रेस ने अजय शाह को उतारा था। ज्योति धुर्वे को 6 लाख 43 हजार 651 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस के अजय शाह को 3 लाख 15 हजार 037 वोट मिले। भाजपा की ज्योति धुर्वे 3 लाख 28 हजार 614 वोटों से चुनाव जीत गई थी। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी एंट्री की थी। उसके प्रत्याशी को 1.97 फीसदी वोट मिले थे और वो तीसरे नंबर पर रहा था।
2009 के चुनाव में भी भाजपा ने ज्योति धुर्वे को मैदान में उतारा था। कांग्रेस ने ओजाराम इवाने को मुकाबले के लिए उतारा था। इस चुनाव में ज्योति धुर्वे को 51.62 फीसदी वोट के साथ 3 लाख 34 हजार 939 वोट मिले थ। दोनों उम्मीदवारों में जीत का अंतर 97317 था।
बैतूल लोकसभा सीट पर भाजपा ने दुर्गादास उइके को मैदान में उतारा। वहीं कांग्रेस ने रामू टेकाम को टिकट दिया था। इसी क्षेत्र में बसपा का भी प्रभाव है, इसलिए बसपा ने अर्जुन अशोक भलावी को मैदान में उतारा था।
इसी सीट पर बसपा ने अशोक भलावी को टिकट दिया था, लेकिन अचानक उनका निधन हो गया तो बसपा ने अशोक भलावी के बेटे अर्जुन भलावी को मैदान में उतारा है। यहां 26 अप्रैल को वोटिंग होने वाली थी, लेकिन उनके निधन के कारण मतदान स्थगित हो गया और 7 मई को चुनाव कराए गए थे।
Updated on:
05 Jun 2024 06:02 pm
Published on:
28 May 2024 07:47 pm

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