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साहब की मेहरबानियां…राशन के खेल में कमीशन की फैल रही बेल

- एक डीलर को थमा दीं तीन-तीन दुकान, 40 किमी दूरी पर स्थित राशन डीलरों को सौंप दिया जिम्मा
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साहब की मेहरबानियां...राशन के खेल में कमीशन की फैल रही बेल

साहब की मेहरबानियां...राशन के खेल में कमीशन की फैल रही बेल

भरतपुर. रसद विभाग ने तमाम विभागीय कायदों को ताक पर रखकर मनमर्जी का अटैचमेंट करने का मामला सामने आया है। विभागीय मेहरबानी के चलते एक-एक डीलर को अटैचमेंट के नाम पर तीन-तीन दुकान संचालित करने को दे दी हैं। विभाग की इस कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठ रहे हैं। इसमें कमीशनखोरी का भी खेल छिपा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार विभिन्न कारणों के चलते रिक्त हुईं राशन की दुकानों को दूसरे डीलरों को अटैचमेंट करने का प्रावधान है, लेकिन नियमानुसार एक डीलर को अधिकतम एक ही दुकान अटैचमेंट के लिए दी जा सकती है। वह भी तीन किलोमीटर के दायरे में होनी चाहिए। अब रसद विभाग ने कई डीलरों को दुकान छह-छह किलोमीटर के दायरे में भी दे दी हैं। कई डीलरों को एक से अधिक दुकानें भी अटैचमेंट के नाम पर दे दी हैं। हाल ही में रसद विभाग की ओर से छह माह या अधिक की अटेचमेंट की अवधि पूर्ण कर लेने वाले उचित मूल्य दुकानदारों को क्षेत्रीय प्रवर्तन अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नवीन वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, इसमें कायदे ताक पर नजर आ रहे हैं।

क्या है अटैचमेंट

जिले में रिक्त, निलंबित, अवकाश व कार्य असमर्थता के चलते छोड़ी गई उचित मूल्य की कई दुकानें हैं। इनका संचालन करने के लिए रसद विभाग दूसरे राशन डीलर को संबंधित उचित मूल्य की दुकान का जिम्मा भी सौंप देता है। एक से अधिक दुकान राशन डीलर के पास होने पर उसे रसद विभाग अटैचमेंट की श्रेणी में मानता है। उक्त व्यवस्था कार्य व्यवस्थार्थ अल्प समय के लिए की जाती है। इस दौरान विभाग को जल्द ही संबंधित दुकान पर स्थायी रूप से नए डीलर की व्यवस्था करनी होती है, लेकिन जिले में वर्षों से चल रही अटैचमेंट प्रणाली को खत्म नहीं किया जा रहा है।

चालीस किमी दूर मिल रहा राशन

उचित मूल्य की दुकानों के अटैचमेंट में रसद विभाग ने नियम ताक पर रख दिए हैं। नियमानुसार किसी भी राशन की दुकान का अटैचमेंट संबंधित दुकान के आस-पास वाली राशन की दुकान में करना होता है, लेकिन विभाग ने दस किलोमीटर से लेकर चालीस किलोमीटर तक की दूरी वाले उचित मूल्य दुकानदारों को दुकानें अटैच कर रखी है।


केस नंबर एक

नदबई से छह किमी दूर स्थित कटारा के राशन डीलर को वार्ड 15 व 16 के राशन डीलर का काम सौंपा गया है। इससे लोगों को राशन लेने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

केस नंबर दो

नदबई के वार्ड तीन व चार, सात व आठ की जिम्मेदारी एक राशन डीलर को दी हुई है। जबकि वह दो वार्डों का पहले से ही डीलर है। नियम के हिसाब से चार वार्डों का ही काम एक डीलर कर सकता है।

इनका कहना है

राज्य सरकार का जो सरकूलर है वह सुझाव के रूप में है। इसमें तीन किलोमीटर से दूर नहीं होनी चाहिए। जहां विकल्प नहीं होता है, वहां व्यवस्था की जाती है। यदि ऐसा कोई मामला है तो उसकी दोबारा जांच करा लेंगे। नदबई में करीब 30-32 डीलर निरस्त चल रहे हैं। ऐसे में वर्तमान डीलरों के माध्यम से व्यवस्था की गई है। नई भर्ती खुलने पर दुकानें आवंटित की जाएंगी। अपवाद स्वरूप एक-दो ऐसे केस हो सकते हैं, जिन्हें नियमानुसार कराया जाएगा।
- सुभाषचन्द्र गोयल, जिला रसद अधिकारी भरतपुर

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