
राजीव चौधरी और विश्वेंद्र सिंह। पत्रिका फाइल फोटो
भरतपुर। भरतपुर-डीग में नगर निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण को लेकर उठे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद भरतपुर-डीग कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने एक बार फिर डीग कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी पर निशाना साधा है। विश्वेंद्र सिंह ने डीग में टिकट वितरण को लेकर जिला संगठन पर सवाल उठाते हुए पांच वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रदर्शन का हवाला दिया है।
पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि डीग जिला अध्यक्ष ने डीग के 40 वार्डों में से 5 वार्ड में टिकिट का वितरण किया। गलत टिकिट वितरण के कारण पांचों वार्डों में परिणाम की शर्मनाक स्थिति रही। इस शर्मनाक परिणाम पर मंथन करने की जगह डीग जिला अध्यक्ष कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की बड़बारी कर रहा है। विश्वेंद्र सिंह ने अपनी पोस्ट में इन पांचों प्रत्याशियों को मिले वोटों का जिक्र भी किया है। विश्वेन्द्र सिंह ने लिखा कि वार्ड नंबर 1 से कांग्रेस प्रत्याशी हेमराज सैनी को 243 वोट मिले। वहीं वार्ड नंबर 10 से प्रियकेश को 14, वार्ड नंबर 12 से बच्चू सिंह मीणा को 56, वार्ड नंबर 34 से राजेंद्र प्रसाद को 86 और वार्ड नंबर 37 से सोहन लाल भारती को 10 वोट मिले।
इससे पहले विश्वेंद्र सिंह पर पलटवार करते हुए राजस्थान युवा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष यशवीर सूरा ने कहा कि भरतपुर-डीग में कांग्रेस की हार का पूरा ठीकरा जिलाध्यक्षों पर फोड़ देना आसान है, लेकिन जिम्मेदारी तह करने से पहले अपनी भूमिका पर भी जवाब देना चाहिए। भरतपुर नगर निगम में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह का नामांकन वापस हुआ और भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर बनीं।
मीडिया में दिए गए बयानों में शिवसिंह के हवाले से कहा गया कि नामांकन वापसी का फैसला आपके दिशा निर्देशों पर हुआ था। जब 36 निर्दलीय पार्षद मौजूद थे और मुकाबले की संभावना थी, तब भाजपा के निर्विरोध मेयर बनने की स्थिति कैसे बनी? और सिर्फ भरतपुर नगर निगम ही क्यों। डीग-कुम्हेर आपकी अपनी विधानसभा है, वहां भी निकाय स्तर पर कांग्रेस अपना बोर्ड नहीं बना सकी तो क्या वहां की राजनीतिक जिम्मेदारी भी केवल जिलाध्यक्षों की थी? अगर जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय हो रही है तो वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक के रूप में आपकी भूमिका पर सवाल क्यों न हो?
विश्वेंद्र सिंह ने एक दिन पहले भी सोशल मीडिया पर 2 पोस्ट किए थे। इनमें उन्होंने भरतपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा, डीग कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण पर सवाल उठाए थे। पहले पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने लिखा था कि भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार-जिम्मेदार कौन? नगर निकाय में कांग्रेस की हार का एक ही कारण है - दोनों जिलाध्यक्षों ने चहेतों को टिकट बांटे और असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया। जनता ने सबक सिखा दिया।पहले निकाय चुनावों में जनता को इन लोगों ने कब्र में दफ़नाया था,लेकिन जनता भी तैयार बैठी है,इस बार चुनाव में जनता इन दोनों जिलाध्यक्षों और इनको बचाने वाले प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को उसी कब्र में दफनाने के लिए तैयार है। ये CM का गृह जिला है, यहाँ कांग्रेस मजबूत होनी चाहिए थी, पर इन लोगों ने पार्टी को डुबो दिया और प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बना बैठा है। जब तक ये दोनों कुर्सी पर हैं, कांग्रेस का उठना नामुमकिन है। प्रदेश नेतृत्व होश में आओ!
दूसरे पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने लिखा था कि 2018 में भर्ती 2016 में डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया और पुत्रवधू के भाई गौरव पूनिया, बहिन प्रज्ञा पूनिया को इंटरव्यू में सभी रिश्तेदारों को समान 80-80 अंक दिए गए। प्रतिभा पूनिया RAS-2016 में चयनित हुई, गौरव पूनिया व प्रज्ञा पूनिया 2018 में चयनित हुए। सत्ता का दुरुपयोग करके साक्षात्कार में अंक दिलाये गये, सभी के समान अंक आना गंभीर संदेह पैदा करता है। साथ ही डोटासरा के पुत्र अविनाश सिंह का 2016 में RAS में चयन हुआ, उसमें OBC प्रमाण पत्र नॉन क्रीमी लेयर का बनवाकर लाभ लिया गया। डोटासरा के समधी रमेश चंद पूनिया भी क्रीमी लेयर होते हुए उनके बच्चों को OBC का लाभ दिलाया गया। इन सब की गहनता से जांच होनी चाहिए।
Published on:
01 Oct 2026 12:20 pm
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