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गोदामों में रखा 52 लाख टन गेहूं नही बिक रहा

धान रखने के लिए गहराया संकट, खुले में रखने की तैयारी - एफसीआई 27 बार जारी कर चुकी है विज्ञापन, गेहूं खरीदने व्यापारियों ने नहीं दिखाई रुचि - अब 2190 की जगह 1800 रुपए प्रति क्विंटल में बेचने का प्रस्ताव - गेहूं भंडारण पर हर माह लग रहा 40 करोड़ का किराया
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भोपाल

•

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Ashok Gautam

•

Dec 03, 2019

गोदामों में रखा 52 लाख टन गेहूं नही बिक रहा,

गोदामों में रखा 52 लाख टन गेहूं नही बिक रहा,

भोपाल। मध्य प्रदेश के गोदाम अनाजों से भरे पड़े हैं। गोदामों में भरे गेहूं को बेंचने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 27 बार टेंडर जारी किए, लेकिन खरीदार ही नहीं आ रहे हैं। अब एफसीआई ने भारत सरकार के पास गेहूं के रेट को रिवाइज कर 2190 रुपए से प्रति क्विंटल से घटा कर 1800 रुपए करने का प्रस्ताव दिया है।

वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार ने इस साल प्रदेश से मात्र 7 लाख टन गेहूं उठाया है, जबकि उसे करीब 52 लाख टन गेंहू उठाना था। इसके चलते राज्य सरकार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, प्रदेश में समर्थन मूल्य धान की खरीदी शुरु हो गई है। गोदामों में जगह न होने से इन्हें खुले में रखना होगा। इसके अलावा मार्च से होने वाली गेंहू खरीदी के भंडारण का भी संकट बना हुआ है।

पीडीएस में बांटने के लिए रखा हुआ है

प्रदेश के गोदामों में अनाज भंडारण की कुल क्षमता 120 लाख टन है। इन गोदामों में करीब 100 लाख टन (गेहूं, चना, सरसो, मसूर, धान, चावल) अनाज कर पिछले दस माह से रखा हुआ है, जिसमें 79 लाख टन गेहंू है। इसमें से 27 लाख टन प्रदेश में पीडीएस में बांटने के लिए रखा हुआ है।

जबकि केन्द्रीय पूल का 52 लाख टन गेहूं मप्र भंडार निगम के गोदामों में रखा हुआ है। भंडार किए गए गेहूं का करीब आठ माह का किराया 361 करोड़ रूपए भी अब तक एफसीआई ने भंडार निगम को नहीं दिया है। इसका भुगतान भी गेहूं उठाने के बाद ही भारत सरकार करेगा। गौरतलब है कि भंडार निगम करीब ६८ रुपए प्रति टन प्रति माह किराया लेता है। इस तरह से ५२ लाख टन गेहूं के भंडारण का प्रति माह का किराया 40 करोड़ रूपए प्रति माह बनता है।

खुले कैप में रखा जाएगा धान-

प्रदेश में आपूर्ति निगम ने धान की खरीदी शुरू कर दी गई है। इस वर्ष 22 लाख टन धान खरीदी का अनुमान है। धान रखने के लिए गोदामों में जगह नहीं होने से बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, कटनी, सीधी, उमरिया और शहडोल सहित करीब 10 जिलों को खुले कैप बनाने के निर्देश दिए हैं। जानकारों का मानना है कि धान को खुले में रखना अच्छा नहीं है क्योंकि उसमें ज्यादा धूप लगाने से मिलिंग के दौरान चावल में टूटन आ जाता है। लेकिन सरकार के पास मजबूरी यह है कि बंद गोदाम इन जिलों में खाली नहीं है। अगर खरीदी कर दूसरे जिलों में भंडारण के लिए ले जाया जाता है तो सरकार पर करोड़ों रूपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।


गेहूं उठाने के लिए लगाई फिर से केन्द्र में अर्जी

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम ने केन्द्र से गेहूं उठाने के लिए एक बार फिर से अर्जी लगाई है। निगम ने इस संबंध में केन्द्र से अपनी परेशानियों के संबंध में भी बताया है। निगम ने भारत सरकार से कहा कि धान खरीदी शुरू हो गई है और उसके भंडारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा हाल में निगम के एमडी अभिजीत अग्रवाल केन्द्र के अधिकारियों से गेहूं उठाने के संबंध में दिल्ली मिलने भी गए थे। जबकि केन्द्र सरकार ने मप्र से गेहूं का उठाव अपनी कार्ययोजना में ही शामिल नहीं किया है।

गेहूं भंडारण की भी होगी दिक्कत

केन्द्रीय पूल के अनाज का उठाव अगर एफसीआई दो माह के अंदर नहीं करता है तो प्रदेश में गेहूं की भंडारण की भी दिक्कत होगी। इस वर्ष बोवनी के पहले कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश में 80 लाख टन गेहूं उत्पादन होने का अनुमान लगाया है। गेहूं भंडारण के लिए सबसे ज्यादा दिक्कत इंदौर-उज्जैन और भोपाल-नर्मदापुरम संभाग में होगी। पिछले साल का ही करीब 7 लाख टन अनाज खुले कैप में रखा हुआ है।



पहले प्रतिमाह केंद्रीय पूल का एक लाख मीट्रिक टन गेंहू उठाया जाता था। अब 3 लाख मीट्रिक टन उठाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में रेल मंत्रालय के अधिकारियों से भी चर्चा की है। गेंहू को खुले बाजार में बेंचने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।

अभिषेक यादव, महाप्रबंधक एफसीआई

केंद्र द्वारा गेंहू का उठाव नहीं करने से अब धान और गेंहू के भंडारण की दिक्कत होगी। इसके साथ ही केंद्र में हमारा पैसा भी रुका हुआ है। उधर हमें बैंकों में करोड़ों रुपए का ब्याज भरना पड़ रहा है। इस संबंध में केंद्र सरकार को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है।
अभिजीत अग्रवाल, एमडी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम