
अस्पताल रूम की फोटो, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Bhopal news: एमपी के भोपाल शहर में स्वाइन फ्लू से 80 वर्षीय बुजुर्ग राम सिंह की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और सूचना व्यवस्था पर सवाल उठ रहे है। ओल्ड मिनाल रेसीडेंसी निवासी बुजुर्ग की मौत एक सितंबर को हुई थी। स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू से मौत की पुष्टि 12 सितंबर की रात को किया। सवाल उठ रहा है कि बुजुर्ग की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए निर्धारित एसओपी के तहत संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी कब शुरू किया।
संक्रामक बीमारी से मौत के बाद मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी निगरानी और जरूरत के अनुसार जांच की जाती है। इस मामले में कितने लोगों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग हुई, कितनों की स्क्रीनिंग की गई और कितने लोगों को निगरानी में रखा गया, इसकी जानकारी विभाग की ओर से स्पष्ट नहीं की गई है।
बुजुर्ग का इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। यह भी जांच का विषय है कि स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल ने समय पर इसकी सूचना आइडीएसपी पोर्टल पर दी थी या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की या नहीं।
भोपाल में अब तक 70 स्वाइन फ्लू के मरीज मिल चुके हैं। इनमें 48 मरीज सितंबर के 12 दिनों में मिले हैं। इस दौरान 232 लोगों की जांच की गई, जिनमें 48 संक्रमित पाए गए। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि स्वाइन फ्लू अभी नियंत्रण में है। गंभीर मरीजों की स्थिति स्थिर है।
इंट्रीगेटेड सर्विलेंस प्रोग्राम (आइडीएसपी) के अनुसार अब तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू से कुल पांच लोगों की मौत हुई है। इनमें से भोपाल, उज्जैन और देवास में एक-एक और इंदौर में दो लोगों की मौत हुई है। मध्यप्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 300 मरीज पाए गए हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के रीजनल इंस्टीट्यूट फॉर रेस्पीरेटरी डीजीजेज (आरआइआरडी) के अधीक्षक और सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र दवे ने बताया कि मानसून और जाड़े के मौसम में एच-1एन-1 वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं।
Updated on:
15 Sept 2026 07:40 am
Published on:
15 Sept 2026 07:39 am
