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CJP के बाद एमपी में VJP की एंट्री, आंदोलन की नई राजनीति! क्या मुख्य धारा के दलों की बढ़ेगी चुनौती?

Political Party MP : CJP के बाद वीजेपी; क्या ये आंदोलन का नया तरीका बन रहा है और ये आगे चल कर मुख्य धारा की पार्टियों के वोट बैंक पर असर डाल सकता है?
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Political Party MP

भोपाल में प्रदर्शन के समय अतिथि विद्वान (फोटो सोर्स: Patrika File)

MP News :मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में नियमितीकरण और परमानेंट नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अतिथि विद्वानों ने अपने राजनीतिक संगठन 'विद्वान जनता पार्टी' यानी वीजेपी की घोषणा करते हुए पार्टी का एजेंडा जारी कर दिया है। अब मामले में बड़ा सवाल ये उठने लगा है कि, क्या ये संगठनों का अपने आंदोलन को मजबूती देने का नया तरीका बन गया है और क्या इस तरह के राजनीतिक दल आगे चल कर मुख्य धारा की पार्टियों के वोट बैंक पर भी असर डाल सकते हैं? पत्रिका के इस विशेष विश्लेषण में आज इसी पर चर्चा करेंगे।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसे आंदोलन का नया तरीका मानना पूरी तरह से तो ठीक नहीं है, क्योंकि ये संगठन स्वेच्छा से न बनते हुए किसी दिग्गज द्वारा दिए गए बयान के बाद वजूद में आए हैं। जैसे मई 2026 में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा एक सुनवाई के दौरान 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी की गई थी। उनके बयान से मचे विवाद के बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से सोशल मीडिया पर एक पार्टी बन गई। अब एमपी में अतिथि विद्वानों द्वारा 'विद्वान जनता पार्टी' की घोषणा भी इसी तर्ज पर हुई है। दरअसल, फॉलन आउट प्रक्रिया खत्म करने की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों की उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से बातचीत हुई थी। दावा है कि, बातचीत के दौरान मंत्री परमार द्वारा कहा गया कि, 'सरकार से खुश नहीं हो और मांगे पूरी करनी हैं तो खुद पार्टी बना लो'। इसके बाद ही अतिथि विद्वानों ने मंत्री का चैलेंज कबूल करते हुए 'विद्वान जनता पार्टी' की घोषणा कर दी।

दोनों दलों के अपने-अपने एजेंडे

हालही में हमने देखा कि, जेनजी के शिक्षा के अधिकारों को लेकर शुरु हुए आंदोलन ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का रूप लिया है। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर एमपी में राजधानी भोपाल समेत लगभग सभी शहरों में सीजेपी के प्रदर्शन देखने को मिले। ये दल खुद को गैर राजनीतिक बताता है, यानी चुनावी मैदान में न उतरने की बात कहता है और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने का दावा करता है, लेकिन परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कराने के बाद अब ये दल चुनाव आयोग की गड़बड़ी से जुड़े आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर लामबंद हो रहा है। वहीं, दूसरी तरफ 'विद्वान जनता पार्टी' खुद को राजनीतिक दल घोषित करने की बात कहते हुए चुनाव के समय में अपने कैंडिडेट भी उतारने का दावा कर रही है। साथ ही, इस पार्टी ने भी अपना एजेंडा जारी कर दिया है।

मुख्य धारा की पार्टियों के वोट बैंक पर असर डाल सकते हैं ऐसे दल?

राजनीतिक जानकारों की मानें तो कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) हो या विद्वान जनता पार्टी (वीजेपी) दोनों ही दल सरकारी सिस्टमों के खिलाफ अपनी-अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक दलों का रूप ले चुके हैं। सीजेपी के प्रदर्शन का परिणाम केंद्र सरकार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से चुकाना पड़ा। वहीं, अब वीजेपी की बात करें तो प्रदेश के कर्मचारी वर्ग को भी सत्ताधारी दल बीजेपी का समर्थक माना जाता है, लेकिन अब अपने अधिकारों का हवाला देते हुए इस वर्ग का एक धड़ा अगर अपना ही एक राजनीतिक दल बना लेता है तो इसका प्रभाव भी मुख्य रूप से सत्ताधारी पार्टी बीजेपी पर ही पड़ेगा। हालांकि, इस तरह ये वोट मुख्य धारा के अन्य दलों के खाते में नहीं जाएंगे, ऐसे में इस तरह के दल बनने से भले ही सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को कुछ वोटों का नुकसान होगा, लेकिन मुख्य धारा के अन्य दलों को कोई खास फायदा नहीं मिल सकेगा। हालांकि, भविष्य के हालात क्या बनते हैं ये तो समय ही बताएगा।