एक साथ टूट गए 11 परिवारों के सपनें, वो तो मां है न उसका दिल नहीं मानता

एक साथ टूट गए 11 परिवारों के सपनें, वो तो मां है न उसका दिल नहीं मानता
एक साथ टूट गए 11 परिवारों के सपनें, वो तो मां है न उसका दिल नहीं मानता

KRISHNAKANT SHUKLA | Updated: 14 Sep 2019, 01:15:18 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

11 परिवारों के सपने पलक झपकते ही टूट गए। जिसने भी इस दर्दनाक हादसे के बारे में सुना, वह अवाक रह गया। अपनों को खोने वाले परिवारों को तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनका बेटा कुछ घंटे पहले ही तो ये कहकर गया था कि सुबह तक आ जाऊंगा...

भोपाल. राजधानी के 11 परिवारों के सपने पलक झपकते ही टूट गए। जिसने भी इस दर्दनाक हादसे के बारे में सुना, वह अवाक रह गया। अपनों को खोने वाले परिवारों को तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनका बेटा कुछ घंटे पहले ही तो ये कहकर गया था कि सुबह तक आ जाऊंगा..., जिगर के टुकड़ों का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए शुक्रवार की सुबह किसी कहर से कम नहीं थी।

12 से 25 साल की उम्र के ये लाड़ले उन्हें रोता-बिलखता छोड़ गए। एक-दूसरे का हर समय साथ निभाने वाले ये सभी दोस्त ऐसे जुदा होंगे, किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। कोई अपने बेटे की शादी की तैयारियां कर रहा था तो बुजुर्ग हो चले माता-पिता को आस थी कि उम्र के अंतिम पढ़ाव में उनका बेटा सहारा बनेगा, लेकिन हादसे ने उनसे उनका सबकुछ छीन लिया।

 

इकलौते बेटे को खोकर बेसुध हुई मां

  • अर्जुन शर्मा (16) निवासी रत्नागिरी की मौत की खबर आते ही मां कविता शर्मा बेसुध हो गईं। इकलौते बेटे को याद करते हुए वह बोलती रहीं कि मेरे बेटे अर्जुन को दो महीने बाद विदेश में फुटबॉल खेलने जाना है। उन्होंने बताया कि अर्जुन गुरुवार को दोस्त तिम्मी के साथ 100 क्वार्टर झांकी देखने गया था।
एक साथ टूट गए 11 परिवारों के सपनें, वो तो मां है न उसका दिल नहीं मानता

जाते समय बोल गया था कि जल्द ही लौट आएगा। हालांकि मां ने उसे मना किया था, पर वह नहीं माना। अर्जुन के पिता करीब 12 साल से अलग रह रहे हैं। उसकी एक छोटी बहन वैष्णवी है। मामा सुनील शर्मा ने बताया अर्जुन 11वीं का छात्र था। उसका सपना फु टबॉलर बनने का था। अर्जुन की मां मेडिकल शॉप में नौकरी करती हैं।

हरि ने बहनों से कहा था, अच्छी नौकरी कर बनाऊंगा मकान

  • हरि राणा वर्षीय हरि राणा के पिता रामू 35 साल पहले नेपाल से आए थे। परिवार में माता-पिता और 25 वर्षीय बड़ा भाई कमल है। हरि ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था, लेकिन बेहद व्यवहारिक और मिलनसार था। वह दो साल से भेल में बतौर ठेका श्रमिक काम कर रहा था।
एक साथ टूट गए 11 परिवारों के सपनें, वो तो मां है न उसका दिल नहीं मानता

परिवार को लगता था कि दोनों बेटे काम पर लग गए हैं तो जल्द ही उनके अच्छे दिन आएंगे। परिजनों ने बताया कि तीन जनवरी को हरि का जन्मदिन वाले दिन सभी लोग इसे धूमधाम से मनाते थे। इस साल बोट क्लब पर जन्मदिन मनाया तो हरि ने चचेरी बहनों से कहा था कि वह जल्द ही अच्छी नौकरी करके भोपाल में अपना मकान बनाएगा। हरि की इन्हीं बातों को याद कर परिवार वाले फूट-फूटकर रो पड़ते हैं। भाई कमल ने बताया कि जब से हरि गुरुवार रात घर से ये कहकर गया था कि जल्द ही लौट आएगा, पर नहीं आया...।

काश वो बात मान कर रुक जाता

  • राहुल वर्मा उर्फ राजू बारहवीं का छात्र था। उसकी दो बहनें व एक भाई है। पिता मुन्नालाल एमपी नगर में प्रायवेट काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जब राहुल ने मूर्ति विसर्जन में जाने के लिए कहा था तो सभी ने मना कर दिया, लेकिन वह जाने की जिद पर अड़ गया।
एक साथ टूट गए 11 परिवारों के सपनें, वो तो मां है न उसका दिल नहीं मानता

उसने कहा था कि सुबह तक आ जाऊंगा। उसकी जिद के आगे परिजनों को झुकना पड़ा। शुक्रवार सुबह बेटे के डूबने की खबर मिली तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनका बेटा अब घर नहीं लौटेगा। मुन्नालाल तुरंत ही तालाब के लिए रवाना हुए। यहां बेटे का शव देखकर वह बेसुध हो गए।

परिवार का सहारा बनने का था सपना

  • आवेश समसेरिया उर्फ विक्की (19) ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। वह 100 क्वार्टर, पिपलानी में संयुक्त परिवार में रहता था। पिता टेलर का काम करते हैं। घर में माता-पिता के अलावा छोटा भाई और बहन है। परिजनों ने बताया कि आवेश प्राइवेट काम करता था।

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उसे बीच में ही पढ़ाई छोडऩी पड़ी। आवेश के दोस्त बताते हैं कि वह मिलनसार और हंसमुख था। परिवार को सहारा देने के लिए वह नौकरी या कोई छोटा-मोटा बिजनेस करने का प्लान कर रहा था। गुरुवार को वह झांकी के साथ खटलापुरा गया था। वहां दोस्तों ने उसे नाव में बैठने से मना किया, पर वह नहीं माना।

एक महीने पहले मनाया 18वां बर्थडे

  • राहुल मिश्रा सओएस बालग्राम के स्टाफ क्वार्टर में रहने वाले राहुल की मां सिंधु मिश्रा का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रही हैं कि मेरा 18 साल का बेटा चला गया, एक महीने पहले ही जन्मदिन मनाया था। बहुत दयालु था मेरा बेटा। मैं यहां नहीं रहूंगी... बस मेरा बेटा ला दो। राहुल के पिता सुनील मिश्रा इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि पत्नी को सांत्वना दे सकें।
एक साथ टूट गए 11 परिवारों के सपनें, वो तो मां है न उसका दिल नहीं मानता


राहुल के दोस्त सार्थक तिवारी ने बताया कि हम सेंट पॉल स्कूल में चौथी क्लास तक साथ पढ़े थे, राहुल बहुत अच्छा फुटबॉल खेलता था और उसका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबॉलर बनने का था। इसलिए उसने कमला देवी पब्लिक स्कूल में एडमिशन लिया था। हम छह अगस्त को उसके जन्मदिन पर मिले थे। वह हमेशा फुटबॉल मैच की बातें करता था। राहुल कुछ दिन पहले ही बाहर से फुटबॉल खेलकर आया था और अगले महीने मैच खेलने जाने वाला था। मां सिंधु मिश्रा बताती हैं कि राहुल हमेशा सभी का ख्याल रखता था। उन बच्चों की मदद के लिए हमेशा आगे रहता था, जिनके ऊपर परिवार का साया नहीं है।

परिवार का इकलौता कमाने वाला

  • विशाल सुनवाने (25) डेढ़ साल से साइनेज गैलरी में काम कर रहा था। साथी कर्मचारी सुनील ने बताया कि विशाल कंपनी के काम से कटनी गया था। गुरुवार दोपहर भोपाल आते ही घर जाने लगा, पर बाद में बोला कि शाम को जाऊंगा। इसके बाद वह मूर्ति विसर्जन के लिए चला गया।

सुनील ने बताया कि विशाल के घर में माता-पिता और छोटे भाई-बहन हैं। पिता पेंटर हैं, लेकिन बीमारी के कारण काम पर नहीं जाते। ऐसे में विशाल पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। उसने छोटी बहन की शादी कराई थी। उसे छोटे भाई की चिंता थी। वह स्मार्ट फोन नहीं रखता था। घरवाले उसकी शादी की बात चला रहे थे।

जो लौट के घर न आए

  1. रोहित पिता नंदू मौर्य (20)
  2. प्रवीण पिता नारायण ठाकरे (22)
  3. हरि पिता रामू राणा (20)
  4. विशाल पिता राजू सुनवाने (25)
  5. करण पिता पन्नालाल (19)
  6. राहुल वर्मा पिता मुन्नालाल (18)
  7. परवेज पिता शाहिद खान (12)
  8. आवेश पिता रामनाथ (19)
  9. अर्जुन पिता योगेंदर शर्मा (16)
  10. राहुल पिता सुनील मिश्रा (18)
  11. अरुण पिता सोनीकुमार (18)

हेलमेट नहीं तो रोकते, आज क्यों नहीं

  • अरुण मालवीय के परिजन उसे याद कर बिलख उठते हैं। मां सावित्री ने रोते हुए कहा, ‘अरुण से कहा था, तालाब तक मत जाना, तिराहे से लौट आना। उसने हामी भरी थी, फिर क्यों चला गया बेटा... रात एक बजे तक उसका इंतजार करती रही, फिर सोचा कि रिश्तेदारों के यहां सो गया होगा, सुबह पांच बजे हमीदिया अस्पताल से फोन आ गया।’ सावित्री कहती हैं कि जब पुलिस हेलमेट नहीं पहनने पर चालान बना देती है तो बेटे को तालाब में जाने से क्यों नहीं रोका। क्यों नहीं देखा कि किसे तैरना आता है, किसे नहीं।


पुलिस थाने में बैठा लेती तो कम से कम उसकी जान बच जाती। इतनी बड़ी मूर्ति लेकर तालाब में क्यों जाने दिया। परिजनों ने बताया कि कुछ महीने पहले अरुण की कार कंपनी में नौकरी लगी थी तो उसकी सगाई की थी, कुछ दिनों बाद शादी होने वाली थी, लेकिन दो बड़े भाइयों सागर और करुण की शादी नहीं होने से अरुण ने अपनी शादी अगले साल तक टाल दी थी। घर पहुंची मंगेतर कंचन ने अरुण को नम आंखों से विदा किया।

एक हफ्ते पहले लगी बंगले पर नौकरी

  • प्रवीण ठाकरे उर्फ सन्नी दो साल से मामा राकेश के पिपलानी स्थित सैलून में काम कर रहा था। राकेश ने बताया कि वह बचपन से मेरे करीब था। काम करने लायक उम्र हुई तो उसे दुकान पर साथ रख लिया। उसे ब्यूटी पॉर्लर का कोर्स कराया।

एक हफ्ते पहले ही उसने मंत्री कमलेश्वर पटेल के 74 बंगला स्थित सरकारी बंगले पर काम करना शुरू किया था। राकेश ने बताया कि इसके बाद प्रवीण उनके पास आया और बोला... मामा अच्छा काम मिला है, कल ही मंत्री के साथ कार में बैठा था। छह महीने में परमानेंट कर देंगे। राकेश ने बताया कि प्रवीण के पिता श्री केबल में हेल्पर का काम करते हैं।

उम्र कच्ची मगर सद्भाव की बड़ी मिसाल था

  • परवेज सओएस बालग्राम रोड स्थित सौ क्वार्टर निवासी 12 वर्षीय परवेज बचपन से मोहल्ले में होने वाले सभी धार्मिक आयोजनों में शरीक होता था। उसकी सभी धर्मों के प्रति आस्था और सद््भाव का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वह गणेश और दुर्गा उत्सव के दौरान देर रात तक झांकियों में सेवा करता था और विसर्जन के लिए तालाब जाता था।


परवेज के चार बड़े भाई और तीन बहने हैं। परिजनों ने बताया कि परवेज पांच साल की उम्र से गणेश और नवरात्रि उत्सव में शामिल हो रहा था। मां शफीका बेगम बताती हैं कि गुरुवार को रात दस बजे परवेज ने कहा था कि आखिरी बार दस रुपए दे दो, गणेश जी की झांकी के लिए अगरबत्ती लेना है। इसके बाद वह सुगंधित अगरबत्ती लेकर झांकी के साथ चला गया।

शुक्रवार सुबह सात बजे परिजनों को परवेज की मौत की खबर मिली तो घर में मातम पसर गया। मां बिलखते हुए बस यही कहती रहीं कि अल्लाह ने पति के बाद बेटे को भी अपने पास बुला लिया। परवेज की मौत की खबर से न केवल परिजन बल्कि मोहल्ले के लोग गमजदा हैं।

सहारा बनने से पहले दूर हुआ बेटा

  • रोहित मौर्य परिवार का इकलौता बेटा था। पिता नंदू 15 साल से लकवाग्रस्त हैं। मां ने कपड़े सिलकर और छोटे-मोटे काम कर रोहित को पाला था। बताया जा रहा है कि डेढ़ साल पहले रोहित को भेल में ठेका श्रमिक का काम मिला था। इससे परिवार को कुछ हद तक सहारा मिला।

शुक्रवार को जैसे ही रोहित की मौत की खबर बस्ती में पहुंची तो पिता बेटे को देखने की जिद करने लगे। पड़ोसी उन्हें मर्चुरी ले गए। पड़ोसियों ने बताया कि रोहित की छोटी बहन को जैसे ही पता चला कि उसका भाई अब इस दुनिया में नही है तब से वह बेसुध हो गई है। किसी को समझ नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा। परिवार का एकमात्र सहारा अब उनसे दूर हो गया है।

2 अक्टूबर को था 18वां जन्मदिन

  • करण लुढ़ेरे - परवेज के घर से चंद कदमों की दूरी पर रहने वाले करण लुढ़ेरे का अगले महीने दो अक्टूबर को जन्मदिन था। वह गांधी जयंती पर 18 साल का होता। चार दिन बाद उसकी परीक्षा भी शुरू होना थी। वह कक्षा 12वीं का छात्र था। परिजनों ने बताया कि करण तीन भाइयों में सबसे छोटा था। पिता स्कूल बस ड्राइवर हैं। करण गुरुवार रात दस बजे मां रेखा को यह बोलकर गया था कि बाइक में पेट्रोल भरवाने जा रहा हूं।
  • इसके बाद वह बगैर बताए झांकी के साथ चला गया। देर रात तक जब वह नहीं लौटा तो बड़े भाई रूपेंद्र ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान पड़ोसियों ने बताया कि वह मूर्ति विसर्जन के लिए दोस्तों के साथ गया है। इसके बाद शुक्रवार सुबह उसके तालाब में डूबने की खबर आते ही घर में कोहराम मच गया। पड़ोसियों ने बताया कि करण बहुत ही व्यवहारिक था। सभी की मदद करता था। किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा है कि जो बच्चा उनके सामने बढ़ा हुआ, वो आज इस दुनिया में नहीं है। करण की मौत की दु:खद सूचना मिलते ही मां एवं भाई बेसुध हो गए। पड़ोसियों ने जैसे-तैसे सभी को संभाला। मां बस यही बोलती रही कि बेटे को ले आओ।
Show More

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned