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भोपाल . मध्यप्रदेश के डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला ने देश की न्यायपालिका पर सवाल उठाए हैं। राजधानी में शुक्रवार को एससी-एसटी वर्ग के प्रति संवेदनशीलता विषय पर आयोजित पुलिस विभाग के सेमिनार में उन्होंने कहा, आज कल जज साहब अपने हिसाब से ही कानून की व्याख्या करने लगे हैं।
हमने पढ़ा है कानून अंधा होता है, और जज साहब को कानून की मंशा के साथ बिना किसी भेदभाव के काम करना चाहिए, लेकिन अब ऐसा हो नहीं रहा। डीजीपी ने कहा कि यह बहुत परेशानी की बात है कि जज के अब खुद के पक्ष और विचारधारा हैं, जो फैसलों में बहुत ज्यादा नजर आने लगे हैं। यह चिंताजनक समय है।
पुलिसवालों की स्थिति पर जताई चिंता
डीजीपी ने कहा, अब यह माना जाने लगा है कि हर पुलिस अधिकारी कानून का पालन नहीं करना चाहता। अभी सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग पर निर्णय दिया है, उसमें भी उन्होंने माना है कि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो पुलिस के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
मेरा मानना है कि समाज में जो तनाव है उस पर पुलिस को विधिक प्रावधानों के तहत नियंत्रण करना है। यह भी ध्यान रखना है कि समाज में व्यवस्था बनी रहे।
वर्ग विशेष को नहीं दी जमानत
एससी-एसटी एक्ट के बारे में चर्चा करते हुए डीजीपी ने कहा कि सोशल मीडिया पर बने माहौल ने मुश्किल बढ़ाई है। हाल ही में एक मामले में एक वर्ग विशेष ने दूसरे वर्ग के व्यक्ति को एक्ट विशेष में आरोपी बनाया, लेकिन जज ने उसे जमानत देने से ही इनकार कर दिया।
मनी लांड्रिंग मामला
करीब 42 करोड़ रूपये के मनी लांड्रिंग मामले में जिला अदालत ने बर्खास्त आइएएस टीनू-अरविंद जोशी की जमानत अर्जी खारिज कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। वहीं उनकी मां निर्मला और पिता हरिवल्लभ एम जोशी को खराब स्वास्थ्य के चलते जमानत मिल गई है। विशेष सत्र न्यायाधीश आलोक अवस्थी ने जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद शुक्रवार शाम यह आदेश दिए।
जमानत पर प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने आपत्ति नहीं की। ईडी की ओर से जोशी दंपति और उनके व्यावसायिक सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया था। इसमें बताया गया था कि जोशी दंपती ने 41 करोड़ 87 लाख से ज्यादा की संपत्ति आइएएस रहते भ्रष्टाचार कर कमाई है।
Published on:
28 Jul 2018 09:07 am
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