
भोपाल. मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग का 27वां स्थापना दिवस सोमवार को मनाया गया। इस अवसर पर Óसंवहनीय विकास-मानव अधिकारÓÓ विषय पर आयोजित व्याख्यान में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति मोहम्मद रफीक मुख्य अतिथि के रूप में जबलपुर से वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की प्रस्तावना में ही मानव के अधिकारों की सुरक्षा निहित है। संवहनीय विकास वह है, जो आने वाली पीढिय़ों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए बगैर वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे। विकास ऐसा होना चाहिए, जो धारण किया जा सके और निरंतर आगे भी बढ़ता रहे। ऐसे विकास को ही संवहनीय विकास की संज्ञा दी गई है। संवहनीय विकास की व्याया तभी और अधिक चरितार्थ होगी, जब ऐसा विकास मानव अधिकारों को ध्यान में रखते हुए किया जाये। विकास के लाभ से कोई भी वंचित नहीं रहना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि हमें मानव विकास और सुख-शांति के बीच तालमेल बिठाने की आवश्यकता है। हमें विकास के नाम पर विशाल बांधों के स्थान पर छोटे बांध एवं तालाबों का निर्माण करना चाहिए। प्रदूषण फैलाने वाले बड़े उद्योगों की जगह लघु उद्योगों को प्रोत्साहन एवं संरक्षण मिलना चाहिए। मुख्य वक्ता प्रो. राजीव कुमार खरे ने कहा कि वह विकास, जो पर्यावरण को बिना क्षति पहुंचाए मानव जीवन को प्रगतिशीलता की ओर अग्रसर रखे, संवहनीय विकास है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में आयोग के सदस्य मनोहर ममतानी एवं सरबजीत सिंह, विषय विशेषज्ञ मुख्य वक्ता के रूप में एनएलआईयू भोपाल के पीजी स्टडीज के डीन एवं विधि विभाग के प्रोफेसर राजीव कुमार खरे, आयोग के सचिव शोभित जैन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुषमा सिंह सहित आयोग के अन्य सभी अधिकारीगण उपस्थित थे।
Published on:
13 Sept 2021 11:55 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
