
प्लेसमेंट और ट्रेनिंग मुहैया कराने में निजी से पिछड़े प्रदेश के सरकारी कॉलेज
भोपाल. बीए, बीकॉम, बीई समेत एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स करने वाले प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट बड़ी समस्या बनती जा रही है। इसकी एक वजह कॉलेजों के फीस स्टेटस के साथ ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट की कमी है। हर साल प्रदेश में केवल महंगे प्राइवेट कॉलेजों में प्लेसमेंट कैंप और इंटरव्यू सेशन को तरजीह दी जाती है। किफायती सरकारी कॉलेज इस रेस में पिछड़ रहे हैं। शिक्षण सत्र 2019-20 के लिए रोजगार कार्यालय की समीक्षा में ये तथ्य सामने आया है कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों के 5.5 लाख विद्यार्थियों में से एक हजार को नौकरी नहीं मिली है। सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कॉलेजों में प्लेसमेंट सेल से संपर्क करने हेल्पलाइन नंबर तो जारी किए, लेकिन इसके आगे के लिए स्पष्ट नीति नहीं बनी है। इधर उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी का कहना है कि सरकारी कॉलेज में प्लेसमेंट की दर बढ़ाने के लिए प्राइवेट कंपनियों से चर्चा जारी है। अगले सत्र में संख्या में इजाफा होगा। इस पर छात्रों का कहना है कि उन्हें पढाई के साथ ही बेहतर प्रशिक्षण और प्लेसमेंट की भी सुविधा मिले। इसके अभाव में कई छात्रों को परेशान होना होता है। उन्हें बेहतर अवसर नहीं मिल पाते हैं।
फीस बढ़वाना चाहते हैं प्राइवेट कॉलेज
सरकार की एडमिशन एवं फीस कमेटी (एएफआरसी) के पास प्रदेश के 2100 प्राइवेट प्रोफेशनल कॉलेज रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 300 ने नए शिक्षण सत्र के लिए फीस कमेटी के सामने आवेदन किए हैं। एएफआरसी के मुताबिक जिन कॉलेजों की सीटें तीन साल से भर रही हैं, उन्होंने फीस बढ़ाने की मांग की है।
सरकारी कॉलेजों में सीटें खालीं
ट्रेनिंग और प्लेसमेंट की कमी के चलते इस साल सरकारी कॉलेजों में लगभग 6 लाख प्रवेश हुए हैं। जनरल की संख्या 64 हजार 86 है, जबकि ओबीसी के एक लाख 24 हजार 974 विद्यार्थी हैं। एससी के विद्यार्थियों की संख्या 4 लाख 64 हजार 488 है, जबकि एसटी के सिर्फ 4 हजार 379 दर्ज हैं।
Published on:
04 Dec 2019 07:03 am
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