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मध्य प्रदेश स्थापना दिवस : जानिए वो कारण जिसके चलते मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया

मध्य प्रदेश की स्थापना से जुड़ी कई भ्रांतियां लोगों को हैं। जैसे मध्य प्रदेश क्यों अस्तित्व में आया? या राजधानी चुने जाने के लिए जब ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में से किसी शहर का नाम तय किया जाना था तो, भोपाल को ही क्यों चुना गया?

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मध्य प्रदेश स्थापना दिवस

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस : जानिए वो कारण जिसके चलते मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया

भोपाल/ 1 नवंबर 1956 को आज ही के दिन मध्य प्रदेस की स्थापना की गई। तब से लेकर अब तक प्रतिवर्ष आज के दिन मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रदेशभर के सभी छोटे बड़े शहरों में आज के जश्न के रूप में सुबह से ही आयोजन शुरु हो गए हैं। प्रदेश का मुख्य राज्य स्तरीय आयोजन राजधानी भोपाल के लालपरेड मैदान में आयोजित होगा। मध्य प्रदेश की स्थापना से जुड़ी कई बातें लोगों को मालूम हैं। हालांकि, इनमें कई भ्रांतियां भी हैं। जैसे मध्य प्रदेश के अस्तित्व में आने का कारण क्या था? या राजधानी चुने जाने के लिए जब ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में से किसी शहर का नाम तय किया जाना था तो, भोपाल को ही क्यों राजधानी चुना गया? मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर हम जानते हैं कि, आखिर इन निर्णयों के पीछे कारण क्या था।

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आजादी के बाद देशभर के कई स्थानों का आजाद भारत के अनुरूप नामांकन किया गया। इसी तर्ज पर 28 मई 1948 को मध्य भारत प्रांत का गठन भी किया गया, जिसमें ग्वालियर और मालवा का क्षेत्र शामिल थे। मध्य भारत प्रांत के पहले राजप्रमुख ग्वालियर रियासत के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया थे। इस प्रांत की दो राजधानियां थीं। ग्वालियर को विटर कैपिटल के रूुृप में जाना जाता था वहीं, इंदौर को ग्रीष्म राजधानी का रूतबा हासिल था। मध्य प्रदेश का पुनर्गठन भाषाई आधार पर किया गया। वहीं 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के बाद देश में सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिसके कारण संसद एवं विधान मण्‍डल कार्यशील हुए।

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...तो अस्तित्व में आया मध्य प्रदेश

प्रशासनिक नज़रिये से इन्‍हें केटेगरी में बांटा गया था। सन् 1956 में राज्‍यों के पुनर्गठन होते समय 1 नवंबर को मध्‍य प्रदेश नए राज्य के रूप में अस्तित्‍व में आया। इसके घटक राज्‍य मध्‍य प्रदेश, मध्‍य भारत, विन्‍ध्‍य प्रदेश और भोपाल थे, जिनकी अपनी अपनी विधानसभाएं थीं। प्रदेश के पुनर्गठन के बाद डॉ. पटटाभि सीतारामैया यहां के पहले राज्यपाल बनाए गए। वहीं, मुख्यमंत्री के रूप में पंडित रविशंकर शुक्ल ने 31 अक्टूबर रात 12 बजे प्रदेश की कमान संभालने की शपथ ली थी। इसके अलावा, पंडित कुंजी लाल दुबे मध्य प्रदेश के पहले अध्यक्ष बने थे।

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भोपाल को राजधानी चुने जाने का सफर

1 नवंबर, 1956 को मध्य प्रदेश के गठन के साथ ही इसकी राजधानी और विधानसभा का चयन भी किया गया। लंबी कशमकश के बाद आखिरकार देश-प्रदेश का दिल कहे जाने वाले भोपाल शहर को प्रदेश की राजधानी के रूप में चुन लिया गया। हालांकि, उस समय भोपाल को जिला घोषित नहीं किया गया था। इसे साल 1972 में जिला घोषित किया गया। इससे पहले भोपाल सीहोर जिले में आता था। मध्य प्रदेश के गठन के समय प्रदेश में कुल 43 जिले ही बनाए गए थे। लेकिन, वर्तमान में बढ़ती आबादी के कारण व्यवस्थाओं को सुचारू ढंग से चलाने के लिए अब तक मध्य प्रदेश में कुल 52 जिले बनाए जा चुके हैं।

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इन शहरों में हुई कड़ी टक्कर के बाद भोपाल को चुना गया राजधानी

मध्य प्रदेश की स्थापना होने से पहले इसकी राजधानी को लेकर लंबी खीचतान भी चली। राज्य के कई बड़े शहरों को राजधानी के स्तर पर रखकर आंका गया। कई क्षेत्रीय विवाद भी सामने आए। भोपाल से ज्यादा ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर का नाम इस दौरान काफी आगे रहा। इसी को देखते हुए जबलपुर में हाई कोर्ट भी स्थापित कर दी गई। लेकिन फिर कुछ क्षेत्रीय कारणों और यहां नवाबी भवनों की संख्या ज्यादा होने के चलते सरकारी कामकाज के लिए उपयुक्त जगह होने के कारण भोपाल को राजधानी चुना गया।

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भोपाल को राजधानी चुने जाने के अन्य कारण

भोपाल को राजधानी के रूप में चुने जाने के पीछे यहां का क्लाइमेट भी बहुत महत्व रखता है। पहाड़ी इलाके यानी ऊंचाई पर बसे इस शहर का हर मौसम अनुकूल रहता है। ना यहां अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा गर्मी पड़ती है, ना ही सर्दी और ना ही थोड़ी सी बारिश से यहां बाढ़ के हालात बनते हैं, इसलिए यहां अन्य शहरों के मुकाबले विकसित किये जाने के ज्यादा मौके थे। इसके अलावा जिस तरह मध्य प्रदेश देश के बीचो बीच स्थित है, ठीक उसी तरह भोपाल भी प्रदेश के बीचों बीच स्थित है। यहां से प्रदेश में चारों और के हालात ज्यादा बेहतर ढंग से जाने जा सकते थे।

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...तो देश की राजधानी होता भोपाल

ऐसा कहा जाता है कि भोपाल को राजधानी बनाए जाने में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा, भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खान और पं. जवाहर लाल नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जवाहरलाल नेहरू के कई करीबियों से तो यहां तक सुना गया था कि, भोपाल देश के ह्रदय स्थल पर होने, क्लाइमेटिक तौर पर अनुकूल होने आदि जैसी स्थितियों के आधार पर इसे देश की राजधानी बनाने की भी इच्छा रखते थे।