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सौर ऊर्जा से चलने वाली गाड़ी बनाकर मैनिट स्टूडेंट्स ने जीता नेशनल अवॉर्ड

मैनिट की टीम सोलारेसर्स ने जीती एमयूवीसी प्रतियोगिता

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सौर ऊर्जा से चलने वाली गाड़ी बनाकर मैनिट स्टूडेंट्स ने जीता नेशनल अवॉर्ड

भोपाल। कोयंबटूर में 27 फरवरी से राष्ट्रीय प्रतियोगिता एमयूवीसी (सौर ऊर्जा वाहन चैंपियनशिप) का आयोजन किया गया था। इस चैंपियनशिप में मैनिट भोपाल की टीम ने भी हिस्सा लिया था। मैनिट की टीम सोलारेसर्स ने इस चैंपियनशिप में नेशनल लेवल पर फस्र्ट प्राइज जीता है।

तीन मार्च को प्रतियोगिता के समापन के मौके पर टीम के सभी सदस्यों को पुरस्कृत किया गया। चैंपियनशिप जीतने के साथ टीम ने सर्वश्रेष्ठ डिजाइन पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ निर्माण गुणवत्ता पुरस्कार, सुरक्षित वाहन पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ मार्केटिंग पुरस्कार जीते। टीम ने इनाम के रूप में 90 हजार रुपए की राशि जीती। देशभर की 40 टीमों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और सॉलारेसर्स इसमें विजेता रहे।

दुर्घटना के समय गाड़ी खुद करती है नजदीकी अस्पताल और परिचित को सूचित
सोलारेसर्स में 30 स्टूडेंट्स का समूह है, जो कि विद्युत अभियांत्रिकी और यांत्रिकी अभियांत्रिकी शाखा में अध्ययनरत हैं। टीम ने 4 महीने के प्रयास से विद्युत सौर वाहन तैयार किया, जो बैटरी और सौर ऊर्जा से चलता है। वाहन की अधिकतम गति 45 किमी प्रति घंटा और औसत गति 38 किमी प्रति घंटा है। वाहन में सुरक्षा से जुड़े सभी सुविधा को देखकर उसे तैयार किया गया।

जो चालक को दुर्घटना के समय बचाव प्रदान करता है। दुर्घटना के समय यह नजदीकी अस्पताल या परिचित को इसकी सूचना देता है। इस वाहन को बनाने में 1.75 लाख का व्यय आया है। विद्यार्थियों ने स्वयं से वित्त पोषित किया है। शिवांश शर्मा (कप्तान), उज्ज्वल महाजन (उपकप्तान), आयुष कोठिया (वाहन चालक), तरुण गंगवार, शिवेंद्र सिंह साईं सूरज, प्रमोद, विजय धाकड़, श्रेया, मलेश, आयुष यादव शामिल थे।
जीपीएस सिस्टम कर देता है अलर्ट
टीम के कप्तान शिवांश ने बताया कि एमयूवीसी में जीपीएस सिस्टम के साथ एक चीप लगाई गई है। जिसमें परिवार के सदस्यों के नम्बर फीड गए हैं। इस गाड़ी में लगे सेंसर्स एक्सीडेंट होने की स्थिति को भांप लेते हैं और तुरंत मैसेज कर देते हैं। जीपीएस सिस्टम गूगल की मदद से आसपास के अस्पतालों का नम्बर खुद ही खोज लेता है और कॉल कर सूचना पहुंचा उन्हें अलर्ट कर देता है।